मां-बाप की खिदमत से संवरती है दुनिया व आखिरत:हैदर अब्बास

 

वाराणसी। नगर के चौक दालमंडी स्थित अजाखाना मरहूम अब्बास बेग महशर में मजलिसे बरसी मरहूम डॉ.मिर्जा हसन बेग व मरहुमा हाजिया बीबी को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद हैदर अब्बास गोपालपुर बिहार ने कहा कि मां-बाप की खिदमत करने वाला शख्स दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब होता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोगों के दरमियान मां बाप की अहमियत कम हो रही है क्योंकि दीनी तालीम की ओर से लोगों का रूझान भी कम हो रहा है। अगर वालदैन अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम भी देते रहें तो बच्चे मां बाप की अहमियत को ज्याद समझेगें और उनकी तरफ तवज्जो भी रखेगें। उन्होंने कहा कि कुरआन से लेकर अकवाले मासूमीन तक मौजूद है जिसमें वालदैन का मरतबा और उनकी अहमियत बताई गई है। कहा कि इस्लाम में वालदैन की सबसे ज्यादा अहमियत है यहां तक कि बेटा खुद भी साहबे औलाद बन जाये बावजूद इसके वालदैन के सामने  खड़े होने पर उसके दोनों शाने इस तरीके से झुके होने चाहिए जैसे वोह हालते इबादत में होता है। अगर समाज वालदैन की अहमियत समझ जाये तो वृद्धाश्रम जैसे संस्थान की कोई जरूरत ही न पड़े। आखिर में उन्होंने वाकये कर्बला बयान करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने दुनिया की सबसे बड़ी कुर्बानी देकर इस्लाम को बचाने का काम किया। जवान बेटे कुर्बान किये, अहबाब, अंसार, भाई भतीजे सबकुछ इस्लाम पर न्योछावर कर दिया ताकि इस्लाम जिंदा रहे। इससे पूर्व सोजखानी कासिम अली खान जानी व उनके हमनवां ने पढ़ा। पेशखानी डॉ.उजैर हैदर, वफा बूतोराबी व शब्बू बनारसी ने किया। अंजुमन हैदरी ने नौहाखानी व सीनाजनी की। आभार डॉ.मोहम्मद रजा बेग उर्फ कब्बन ने प्रकट किया। इस मौके पर मुर्तजा अब्बास शम्सी, शराफत हुसैन, लियाकत हुसैन, नदीम, डॉ.नन्हें सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

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