जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया कर्बला ने:हसन अकबर

 

जौनपुर। नगर के हैदरी अज़ाखाना सदर चुंगी अटाला मस्जिद के पास बुधवार की रात मजलिसे अरबईन को खिताब करते हुए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना हसन अकबर खान ने कहा कि माहे मोहर्रम का महीना खत्म हो चुका है और सफर का महीना शुरू हो चुका है। ये महीना हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत के बाद उनके परिजनों पर ढहाये गये जुल्म के लिए याद किया जाता है। 

इस महीने में हजरत इमाम हुसैन अ.स. के परिजनों को कैदी बनाकर कर्बला से कूफा व मदीने क ी गलियों में ऊंटो पर बैठाकर बे पर्दा घुमाया गया था। यजीदी हुकूमत की जुल्म की इंतिहा इतनी ज्यादा थी कि उन्हें छोटे छोटे बच्चों पर भी रहम नहीं आता था यही वजह थी कि इमाम जैनुल आब्दीन अ.स. ने रिहाई के बाद अपने चाहने वालों से कहा था कि जब भी मैं यहां से गुजरता हूं तो वोह याद ताजा हो जाती थी जब हमारी बहन बेटियों व अन्य लोगों को बेपरदा यजीदी हुकूमत में घुमाया गया था। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपनी शहादत जो इंसानियत के लिए पेश की उसने ये बात साबित कर दी कि हर जुल्म व जालिम के खिलाफ हमें अपनी आवाज बुलंद करना चाहिए और मजलूमों का सहारा बनना चाहिए।

 मौलाना हसन अकबर ने कहा कि आज पूरी दुनिया से कर्बला इराक में हजरत इमाम हुसैन अ.स. का चेहलुम मनाने के लिए करोड़ों लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। ऐसे में हम लोग भी अपना नजरानए अकीदत इमाम व उनके परिजनों को पेश करते हैं। इससे पूर्व सोजखानी सैयद नजर हसन एडवोकेट व उनके हमनवां ने पढ़ी, पेशखानी मेंहदी जैदी व सज्जाद हुसैन ने किया। बाद खत्म मजलिस अंजुमन मजलूमिया पोस्तीखाने के नौहे खां अनम हसन ने अपने दर्द भरे नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन कर दिया। इस मौके पर कैश अली, पप्पू, राजू सहित अन्य लोगों ने आये हुए अजादारों का आभार प्रकट किया।

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