डाक्टर बनना चाहती है मेधावी विशाखा

 सिकरारा, जौनपुर। बचपन से ही मेरा एकमात्र लक्ष्य डाक्टर बनना है। देश में डाक्टरों की बहुत कमी है। देश में अधिक से अधिक डाक्टर होने चाहिए और इसलिए एकमात्र लक्ष्य डाक्टर बनने का है। डाक्टरी पेशा शुद्ध रूप से सेवा और मानवता का क्षेत्र है, इसलिए इस पेशे में जाना चाहती हूँ। लक्ष्य प्राप्ति के लिए स्कूली शिक्षा के अलावा मैं घर पर 4 घंटे की पढ़ाई करती हूँ। उक्त बातें 600 में 581 अंक लाने वाली विशाखा सिंह ने कही जिसके पिता रत्नाकर सिंह सिकरारा बाजार में दुकान चलाते हैं एवं मां रेनू सिंह गृहिणी हैं।

मां शारदा इण्टरमीडिएट बालिका विद्यालय खानापट्टी सिकरारा की छात्रा विशाखा ने 96.83 प्रतिशत अंक अर्जित किया जिसने बताया कि उनके माता-पिता ने अपनी इच्छा उन पर कभी नहीं थोपी। माता-पिता का पूरा समर्थन और सहयोग मिला सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व स्कूल के अध्यापकों को जाता है। बड़ी बहन कलश को इंटर में 348 अंक मिला है जबकि छोटा भाई क्षितिज कक्षा 9 का छात्र है।

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