कैश में मिलेगा पर्चा , ट्रेजरी व बैंक में जमा होगी जमानत धनराशि

जौनपुर। उप जिला निर्वाचन अधिकारी  ने सर्व साधारण को अवगत कराया है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन-2023 में नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों की सुविधा हेतु पैम्फलेट की व्यवस्था की गयी है। नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन-2023 में उम्मीदवारों द्वारा नाम निर्देशन पत्र के साथ निम्न अभिलेख,प्रमाण-पत्र संलग्न किये जाने है।

            नगर पालिका परिषद , नगर पंचायत के अध्यक्ष पद हेतु निर्वाचन लढ़ने वाले उम्मीदवार की आयु 30 वर्ष तथा सदस्य पद हेतु 21 वर्ष होनी चाहिए। उम्मीदवार सम्बन्धित नगर निकाय का निर्वाचक हो। 
              कोई भी उम्मीदवार एक से अधिक परन्तु दो से अनधिक वार्डो से निर्वाचन लड़ सकेगा। नाम निर्देशन पत्र नगद मूल्य देकर क्रय किया जा सकेगा।
         जमानत की धनराशि चालान द्वारा ट्रेजरी में जमा कराई जा सकती है तथा चालान की एक प्रति नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी। जमानत की धनराशि ट्रेजरी चालान द्वारा बैंक व कोषागार में निम्न लेखा शीर्षक के अन्तर्गत जमा की जाएगी। 8443-सिविल जमा-121-चुनावों के सम्बन्ध में जमा 05 स्थानीय निकायों के निर्वाचनों के लिये जमा’’
           जमानत की धनराशि नगद भी जमा करायी जा सकती है। जमा के प्रमाण स्वरूप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी रसीद देंगे। अनारिक्षत श्रेणी के अध्यक्ष नगर पालिका परिषद का नाम निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 500, जमानत की धनराशि 8000 रुपये, अनु0जा0/अनु0ज0जा0/अन्य पिछड़ा वर्ग/महिला उम्मीदवारों के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 250 रुपये और जमानत राशि 4000 रुपये। अधिकतम व्यय सीमा रुपये 9 लाख है। अनारिक्षत श्रेणी के सदस्य नगर पालिका परिषद के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 200, जमानत धनराशि 2000, नाम निर्देशन का पत्र का मूल्य 100 रुपये और जमानत राशि 1000 रुपये। अधिकतम व्यय सीमा रुपये 2 लाख है। अनारिक्षत श्रेणी के अध्यक्ष नगर पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 250, जमानत धनराशि 5000, नाम निर्देशन का पत्र का मूल्य 125 रुपये और जमानत राशि 2500 रुपये। अधिकतम व्यय सीमा रुपये 2.5 लाख है। अनारिक्षत श्रेणी के सदस्य नगर पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 100, जमानत धनराशि 2000, नाम निर्देशन का पत्र का मूल्य 50 रुपये और जमानत राशि 1000 रुपये। अधिकतम व्यय सीमा रुपये 50 हजार है।
              किसी उम्मीदवार द्वारा एक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन हेतु अधिकतम 04 नाम निर्देशन पत्र भरे जा सकते है। परन्तु उक्त निर्वाचन क्षेत्र के लिए जमानत की धनराशि एक बार ही जमा की जाएगी।
           उम्मीदवारों के नाम निर्देशन पत्र एक प्रस्तावक द्वारा हस्ताक्षरित किये जाएंगे तथा उम्मीदवार एवं प्रस्तावक का फोटो भी नाम निर्देशन पत्र पर चस्पा किया जाएगा। सदस्य नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के मामले में प्रस्तावक उसी कक्ष का निर्वाचक होगा जिस कक्ष से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है किन्तु अध्यक्ष नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के मामले में प्रस्तावक उक्त निकाय के किसी भी कक्ष का निर्वाचक हो सकता है जिस निकाय से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है। कोई मतदाता एक से अधिक अभ्यर्थी को प्रस्तावक के रूप में नाम निर्दिष्ट नहीं कर सकता है। नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न किये जाने वाले अभिलेख/प्रमाण-पत्र- सम्बन्धित निकाय के एक वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार न होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।
           उम्मीदवार जिस कक्ष का निर्वाचक है उससे भिन्न कक्ष से निर्वाचन लड़ने पर उम्मीदवार को निर्वाचक नामावली की सुसंगत प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न करनी होगी। जमानत की धनराशि जमा किये जाने की रसीद। यदि उम्मीदवार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ी जाति का है तो उसे सम्बन्धित तहसीलदार द्वारा जारी किया गया जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही आयोग द्वारा जारी आदेश  साथ संलग्न प्ररूप शपथ-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। उक्त शपथ-पत्र नोटरी/तहसीलदार/नायब तहसीलदार में से किसी एक द्वारा सत्यापित कराया जा सकता है।   उपर्युक्त शपथ पत्र के प्ररूप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी से निःशुल्क प्राप्त किये जा सकते है। उम्मीदवारों द्वारा निर्धारित प्ररूप पर आपराधिक एवं सम्पत्तियों/दायित्वों का विवरण सम्बन्धी पत्र भी नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न किया जायेगा जिसका प्ररूप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है तथा उक्त शपथ-पत्र कार्यकारी/मजिस्ट्रेट/तहसीलदार/नायब तहसीलदार (जिन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के अधिकार प्रदत्त कर दिये गये हो/सार्वजनिक नोटरी से सत्यापित कराया जा सकता है। उम्मीदवार नाम निर्देशन पत्र जमा करने की रसीद अवश्य प्राप्त करें। कोई प्रत्याशी किसी राजनैतिक दल द्वारा खड़ा किया गया तभी और केवल तभी समझा जायेगा जब- (क) उस प्रत्याशी ने इस आशय की घोषणा अपने नाम निर्देशन पत्र में कर दी हो। (ख) उम्मीदवार ने इस आशय की लिखित सूचना सम्बन्धित दल के प्राधिकृत पदाधिकारी द्वारा प्ररूप-7(क) में उम्मीदवारी के अन्तिम दिनांक व समय से पूर्व सम्बन्धित निर्वाचन अधिकारी को प्रदत्त कर दी गयी है।
(ग) उक्त सूचना दल के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा अधिकृत किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रपत्र- 7 (ख) पर हस्ताक्षरित हो। (घ) ऐसे प्राधिकृत व्यक्ति का नाम एवं उनके नमूने के हस्ताक्षर प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सम्बन्धित निर्वाचन अधिकारी तथा सम्बन्धित जिला निर्वाचन अधिकारी को उम्मीदवारी के अन्तिम दिनांक व समय तक प्ररूप-7 (ख) में सूचित किया गया हो।
प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा अपने समर्थक उम्मीदवार के पक्ष में निर्गत किये जाने वाले प्ररूप-7 (क) एवं 7 (ख) की सूचना निम्न दशाओं में मान्य नहीं होगी -
(क) यदि उक्त प्ररूप-7(क) एवं 7 (ख) की सूचना फैक्स के माध्यम से प्राप्त होती है।
(ख) यदि उक्त प्ररूप-7(क) एवं 7 (ख) की सूचना सत्य प्रतिलिपि हस्ताक्षर या मुहर द्वारा हस्ताक्षर से प्राप्त होती है। उम्मीदवारी हेतु अनर्हताएँ- निम्न कारणों से कोई व्यक्ति निर्वाचित होने के लिए अनर्ह होगा -
(क) वह अनुन्मोचित दिवालिया हो। (ख) वह नगर निकाय या उसके नियंत्रण में कोई लाभ का पद धारण करता हो। (ग) वह राज्य सरकार/केन्द्रीय सरकार/स्थानीय प्राधिकारी की सेवा में हो अथवा जिला सरकारी काउन्सिल/अपर या सहायक जिला सरकारी काउसिन्ल/अवैतनिक मजिस्ट्रेट/ अवैतनिक मुन्सिफ/अवैतनिक सहायक कलेक्टर हो। (घ) वह किसी प्राधिकारी के आदेश द्वारा विधि व्यवसायी के रूप में कार्य करने से विवर्जित किया गया हो। (ङ) वह किसी स्थानीय प्राधिकारी का पदच्युत सेवक हो और जिसे पुनः सेवायोजन के लिए विवर्जित किया गया हो।
(च) भारत सरकार/राज्य सरकार के अधीन ग्रहण किये गये किसी पद से भ्रष्टाचार अथवा राजद्रोह के कारण पदच्युत हुआ हो और पदच्युत होने के दिनांक से 06 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो। (छ) उसे किसी न्यायालय द्वारा इन अधिनियमों में उल्लिखित किसी अपराध के लिए दोषी पाया गया हो या सदाचार बनाये रखने के लिए पाबन्द किया गया है और 5 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो। (ज) उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा-16 के अन्तर्गत महापौर पद से हटाया गया अथवा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा-40 (3) के अन्तर्गत सदस्य पद हटाया गया हो और हटाये जाने के दिनांक से 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो अथवा धारा-48(2) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) ( vi ), ( vii ) या ( viii) के अन्तर्गत अध्यक्ष पद से हटाये जाने की दशा में अपने हटाये जाने के दिनांक से 5 वर्ष की अवधि तक अध्यक्ष या सदस्य के में पुनर्निर्वाचन का पात्र नहीं होगा। (झ) वह नगर निकाय को देय किसी कर का 01 वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार हो। (´ ) वह उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा-80 के अधीन अथवा उ0प्र0 नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-27 व 41 के अधीन अनर्ह हो।

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