पशुपालन विभाग भगवान भरोसे, कहीं डाक्टर की कमी तो कहीं दवाओं का अभाव

सिरकोनी, जौनपुर। जहां उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी दोगनी करने के लिए पशुपालन को बढ़ावा दे रही है, वहीं बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था बद से बदतर स्थिति में चली गयी है। पशुओं के लिये एक भी ब्लॉक में पशु चिकित्सालय नहीं है। अगर पशु बीमार हो तो कहा जाय। किसान पशुओं को सिर्फ भगवान के भरोसे जिला रहे है। जब भी पशुपालक अपने बीमार पशुओं को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचते हैं तो वहां उन्हें डॉक्टर नही मिलते अगर डॉक्टर मिल भी गए तो कई दवाइयां नही मिलती। अगर बात की जाय सिरकोनी विकास खण्ड की तो इस विकास खण्ड में 6 पशु सेवा केंद्र हैं। ब्लॉक में एक भी पशु चिकित्सालय नही है। ग्रामीणों से जानकारी लेने पर पता चला कि पशुपालक गाय, बैल, बकरी, भैंस, कुत्ता के बीमार होने पर शहर के अस्पताल की दौड़ लगाते हैं।

लोगों की मानें तो पशु सेवा केंद्र पर भी डॉक्टर समय से उपस्थित नहीं होते हैं। पता चला कि ये गाहे-बगाहे पशु सेवा केंद्र खोलते हैं। मीटिंग या रिपोर्ट जमा करने आदि के लिए। जब वे मुख्यालय जाते हैं। ऐसे में पशु सेवा केंद्र पर बन्द हो जाते हैं। कृत्रिम गर्भाधान के अलावा चलंत पशु सेवा केंद्र पर पशुओं की इलाज की व्यवस्था है परंतु चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में ये योजनाएं सुचारू ढंग से नहीं चल पा रही है। समय पर टीकाकरण सहित अन्य इलाज न हो पाने से मूक पशु असमय ही काल-कलवित हो जाते हैं। परेशान पशुपालक प्राइवेट चिकित्सक या बिना डिग्री वाले डॉक्टर के भरोसे रहने को मजबूर हैं।
इस बाबत पूछे जाने पर पशुधन प्रसार अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि सिरकोनी ब्लॉक बहुत पुराना ब्लाक है। इसमें 6 पशु सेवा केंद्र है ब्लाक में 66 गांव हैं। इसमें पशु चिकित्सालय होना चाहिए। पशु चिकित्सालय न होने के कारण कुछ असुविधाएं होती हैं। कई बार शायद शासन को पत्र लिखा गया है। अभी तक कुछ हुआ नहीं। अगर पशु चिकित्सालय होता तो जनता को कुछ आराम हो जाता। हमारे हर ब्लॉक को एक बहुउद्देश्यीय सचल वाहन की प्रभुता है जिससे हर गांव में कैम्प किया जाता है। अब तो एक मोबाइल एम्बुलेंस आ गयी है। आप 1962 डायल करेंगे तो एम्बुलेंस आपके दरवाजे पर आ जायेगी। जर्जर केंद्रों के बारे में कई बार विभाग को लिख कर दिया गया है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। हम लोगों को खुद डर रहता है कि कभी गिर न जाय। स्टॉफ की कमी व सचल वाहन न होने से टीकाकरण करने में समय लग रहा है। अगर सचल वाहन मिल जाय तो टीकाकरण जल्दी हो सकता है। अगर हमारे बड़े अधिकारी हमारी मदद करे तो टीकाकरण 31 जुलाई तक पूरा हो जाय।
जगदीशपुर निवासी अमित सिंह ने बताया कि पशु सेवा केंद्र है लेकिन जर्जर है। न वहां डॉक्टर हैं और न ही टीकाकरण हुआ है। हम लोग मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टर बुलाकर इलाज कराते हैं। जगदीशपुर निवासी बलिराज यादव ने कहा कि आज तक सरकारी डॉक्टर का पता ही नहीं है। हम लोग आज तक देखे नहीं है कि कौन डॉक्टर है। प्राइवेट डॉक्टर के भरोशे ही हम लोग पशु को जिला रहे हैं। ग्यासपुर निवासी अरविंद यादव ने कहा कि हम लोगों को आज तक नहीं पता कि कहां पर डॉक्टर बैठते हैं। पशु चिकित्सालय न होने से हम लोगों का काफी दिक्कतें होती है। अभी हमारे गांव में टीकाकरण नही हुआ है। बहरीपुर गांव निवासी चचंल सिंह ने कहा कि अपना पैसा खर्च करके हम लोग अपने पशु का इलाज कराते हैं। आज तक कोई नही देखा कि गांव में सरकारी डॉक्टर आये हो।

क्या कहते हैं जिम्मेदारी अधिकारी
इस बाबत पशु चिकित्सा अधिकारी डा. परमहंस राय ने बताया कि जनता से जमीन मांगी जा रही है। अगर निशुल्क जमीन किसी ग्रामसभा में मिलती है तो पहले पद सेंशन होगा, उसके बाद अस्पताल बनेंगे। जो पशु सेवा केंद्र जर्जर है। कुछ तो पीडब्ल्यूडी से है। उनको पहले पीडब्ल्यूडी में घोषित कराकर तब बजट की मांग की जाएगी। कुछ जर्जर भवनों की मांग हम कर चुके हैं। जो एक जिलास्तरीय अधिकारी को वाहन मिला था, वह खराब हो चुका है। बहुउद्देश्यीय सचल वाहन हम उपयोग कर रहे हैं। शासन को लिखकर दिया गया है। जैसे ही शासन से मिलेगा उसको छोड़ दिया जाएगा। स्टॉफ की कमी के कारण कुछ दिक्कते आ रही है।

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