गर्भवती महिलाए डेंगू से बचाव के लिए अधिक बरतें सावधानी : डॉ शमीम

खेतासराय(जौनपुर) शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक डेंगू के मरीजों की बढ़ोतरी से लोगों की चिंता बढ़ गई है । सबसे अधिक संक्रमित पीड़ितों की संख्या निजीय अस्पतालों में देखने को मिल रही है । लोग मच्छर के इस पोषित बीमारी से लोगों में खौफ़ है । विशेषज्ञों की मानी जाय तो संक्रमण उन लोगों को अधिक खतरा रहता है जिनका रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में कम होता है । 

नगर के होमियोपैथिक क्लिनिक एंड प्रिवेंटिव केयर सेंटर के डायरेक्टर डॉ शमीम अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि डेंगू संक्रमण छूआछूत की बीमारी नहीं है। इस समय वाइरल फीवर और डेंगू संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। डेंगू संक्रमण एडिस मच्छर काटने से होता है। डेंगू बुखार जनस्वास्थ्य के लिए खतरा प्रदर्शित करता है। किसी व्यक्ति में लक्षण विकसित होने के दो दिन बाद तक संचरण हो सकता है।डेंगू बुखार का लक्षण आमतौर पर चार से छः दिन बाद शुरू होता है और दस दिनों तक लगभग रहता है । 

श्री अहमद ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान डेंगू संक्रमण बहुत ही जोखिम भरा है । गर्भवती महिलाओं को डेंगू से बचाव के लिए ख़ास एहतियात बरतने की जरूरत है । एक सवाल के जवाब में कहा कि स्लाइन या दवा देने से गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म या हैमरेजिक होने पर गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है ।

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