सिर्फ कागज़ी कार्यवाही करने में जुटा विश्वविद्यालय प्रशासन - उद्देश्य सिंह

 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में समस्याओं और शिकायतों को लेकर जो भी समितियां जांच हेतु बनाई जाती हैं उनकी जांच की आख्या कई माह तक प्रस्तुत ही नहीं होती या उन्हें निष्क्रिय कर दिया जाता है।ऐसे ही आरोप लगाते हुए छात्र नेता उद्देश्य सिंह ने बताया की विश्वविद्यालय में जब किसी भ्रष्टाचार या छात्र हित के मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराया जाता है तो वह तत्काल प्रभाव से जांच समितियों का गठन तो करती है परंतु वह जांच कभी पूरी नहीं हो पाती या उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और सरासर अन्यायपूर्ण है।

विगत चार माह पूर्व विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान के शिक्षक डॉ विनय वर्मा का रिश्वत मांगने को लेकर वीडियो वायरल हुआ था जिस प्रकरण को प्रमुख समाचार पत्रों ने उठाया भी था।जिसे लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से पत्र जारी करते उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी हुई थी और यह भी वर्णित था की क्यों न ऐसे कृत्यों के लिए शिक्षक की संविदा समाप्त कर दी जाए।उक्त विषय की जांच के संबंध में  विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो० राजेश शर्मा व मास कम्युनिकेशन विभाग के डॉ मनोज मिश्र के साथ साथ उप कुलसचिव अमृत लाल की देख रेख में जांच समिति का गठन किया गया था और समिति को निर्देशित किया गया था की दो सप्ताहों के अंदर प्रकरण की जांच कर आख्या उपलब्ध कराई जाए।साथ ही में यह भी आदेशित किया गया था की जांच पूर्ण होने तक डॉ विनय वर्मा को अध्यापन कार्य के अतिरिक्त अन्य सभी कार्य व गतिविधियों से विरत किया जाए।

परंतु जांच समिति ने चार माह के उपरांत अभी तक कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आरोपी शिक्षक को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण करने हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया।जिसके बाद आरोपी शिक्षक द्वारा विश्वविद्यालय के मंच पर प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति में अतिथियों का स्वागत व अन्य कार्य कराया जाने लगा।जिससे यह स्पष्ट होता है की आरोपी शिक्षक को विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संरक्षण प्राप्त है।भ्रष्टाचार के मुद्दो में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ऐसा ढुलमुल रवैया चिंताजनक है।एक तरफ तो प्रशासन भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बातें करता है वही दूसरी ओर जांच को निष्क्रिय कर ऐसे आरोपियों को संरक्षण देता है।

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  1. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है नेक ए प्लस मिलने के बाद विश्वविद्यालय में कार्यरत समस्त शिक्षक आचार्य सोच रहे हैं कि विश्वविद्यालय में अपना भ्रष्टाचार यूं ही फलते रहेंगे और ए प्लस प्लस प्राप्त कर सकती है इसी भ्रष्टाचार के बदौलत

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  2. पूर्वांचल विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार इस कदर हो फैल चुका है कि पूर्व में चीफ वार्डन रहे राजकुमार सोनी जो को जो की एक भ्रष्टाचार का आरोपी भी रह चुका है भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया उनके ऊपर आज माहौल यह उसे के के डॉक्टर बना दिया जाता है दिया जाता है विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा

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  3. इसको इस दलाल गिरी के चक्कर में लोगों को बदनाम करने की साजिश कर रहा है और विश्वविद्यालय की छवि खराब कर रहा है इसको बिना मेहनत के सर्वोच्च पद चाहिए और बड़े के बगल में बैठना आजकल की जनरेशन का बिना मेहनत के फल चाहिए इसलिए कर रहा है कृपया हो सके तो ऐसी चीजों को प्रकाशित न करें जिस लेवल का काम है विश्वविद्यालय का काम था विश्वविद्यालय प्रशासन से पदाधिकारी से पूछ कर करना चाहिए

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