होली पर मिलावट का तेल बिगाडेगा सेहत
https://www.shirazehind.com/2017/03/blog-post_27.html
जौनपुर। होली का त्योहार आ रहा है, ऐसे में मौकों पर बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री भी धड़ल्ले से होती है। घी, तेल, दूध, मावा, खोया आदि में खूब मिलावट होती है। यहां तक कि दैनिक जीवन में उपयोग करने वाले मिर्च मसालों में भी मिलावट होती है। हालांकि मिलावट खोरी पर अंकुश लगाने को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 में उम्र कैद की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। इस सबके बावजूद बाजार में नकली सरसों का तेल धड़ल्ले से बिक रहा है। असली सरसों के तेल की तरह से ही एकदम पीले और चमकीले रंग का यह मिलावटी तेल बाकायदा ब्रांडे्ड कंपनी की बोतल और टीन में रैपर लगाकर उपलब्ध है। तेल माफिया सरसों के तेल में मिलावट करके जहां लाखों में खेल रहे हैं, वहीं जनता आर्थिक एवं शारीरिक दिक्कतों सामना करना पड़ रहा है। लगातार नकली तेल और घी का इस्तेमाल करके लोग पेट की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। यहां तक कि लगातार मिलावटी खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल से लीवर डैमेज होने का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम कही भी जिले में छापेमारी नहीं कर रही है। बताते हैं कि शुद्ध सरसों के तेल से आधी कीमत पर ही पॉमआयल व चावल के छिलके से तैयार तेल को मिलाकर मिलावटी सरसों का तेल तैयार किया जा रहा है। शुद्ध सरसों के पीले रंग के लिए खतरनाक केमिकल का प्रयोग कर माफिया जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। मिलावटखोर राइस ब्रान या पॉम ऑयल में आधा से एक तिहाई तक सरसों का तेल मिलाते हैं। इन तेलों में खुशबू नहीं होती है। सरसों के तेल की असली खुशबू के लिए इसमें एसेंस मिलाये जाते हैं। ऐसे नकली तेल बनाकर माफिया कई गुना तक फायदा कमाते हैं। सरसों के पीले तेल की तरह ही दिखने के लिए इसमें एक पीला केमिकल युक्तर से मिलाया जाता है। इसके बाद तेल को मार्केट में सप्लाई कर दिया जा रहा है।
