राज्य सूचना आयुक्त ने जनसूचना अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण

 जौनपुर।  राज्य सूचना आयुक्त पारस नाथ गुप्ता द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम 2005 एवं उत्तर प्रदेश सूचना अधिकार नियमावली 2015 के विहित प्राविधानों के विषय में जनपद स्तरीय जन सूचना अधिकारी/अपीलीय अधिकारियों को द्वितीय चरण का आज कलेक्टेªट स्थित प्रेक्षागृह में पूर्वान्ह 10 बजे से प्रशिक्षण दिया गया। सर्वप्रथम आयुक्त एवं जिलाधिकारी के द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मा. राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 एक क्रंातिकारी अधिनियम है भारत एक प्रजातांत्रिक देश है जिसमें जनता को किसी भी जानकारी को प्राप्त करने का अधिकार है उक्त प्रशिक्षण में जन सूचना अधिकारियों को बताया गया कि सूचना अधिकार अधिनियिम 2005 को 12 अक्टूबर 2005 से पूरे देश में प्रभावी रुप से लागू है अधिनियम के उद्देश्य है कि नागरिकों के सूचना के अधिकार को कार्यान्वित करने के लिए व्यवहारिक प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना। लोक प्राधिकरण के नियत्रण में उपलब्ध सूचना तक नागरिकों की पहुंच को सुनिश्चित करना। प्रत्येक लोक प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जबाबदेही विकसित कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना। 
    उ0प्र0 सूचना का अधिकार नियमावली 2015 महत्व व स्वरुप - यह नियमावली सूचना प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत आवेदनों का परीक्षण कर निर्णय लेने के स्पष्ट आधार व मापदण्ड निर्धारित करती है। संबंधित अभिलेखों और सूचना के आवेदनों का व्यवस्थित रख-रखाव सुनिश्चित करने के लिए आवेदकों, जन सूचना अधिकारियों एवं अपीलीय प्राधिकारियों के लिए प्रारुप निर्धारित किया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रियात्मक एकरुपता बनी रहे। 
  सूचना अधिकार अधिनियम 2005 व उ.प्र. सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के अन्तर्गत आवेदन के निस्तारण की प्रक्रिया चरण 1 आवेदन का प्रारम्भिक परीक्षण और उसकी पावती। चरण 2 आवदेन का विस्तृत परीक्षण। चरण 3 शुल्क की गणना, चरण 4 आवेदन का निस्तारण। आवेदन के निस्तारण की प्रक्रिया चरण 1 नियम 4(1) आवेदन पत्र प्रारुप 2 या प्रारुप 2 के विवरण सहित सादे कागज पर प्राप्त किया जा सकता है। आवेदन में आवेदक का नाम, आवेदक के पिता/पति का नाम तथा पत्राचार का पूर्ण पता होना चाहिए ताकि आवेदक से सम्पर्क किया जा सके। आवेदन के साथ रु0 10 की धनराशि नकद जमा करने की रसीद/डिमान्ड ड्राफ्ट/बैंकर्स चेक/पोस्टल आर्डर संलग्न होगा। बीपीएल श्रेणी के आवेदकों से कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा, परन्तु आवेदन पत्र के साथ बीपीएल श्रेणी संबंधी प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है। नियम 4(3)- नाम, पता व आवेदन शुल्क (अथवा बीपीएल प्रमाण पत्र) सहित प्राप्त आवेदन को जन सूचना अधिकारी प्रारुप-3 पर बनाया गया रजिस्टर पर अंकित करेंगा। आवेदन के निस्तारण की प्रक्रिया चरण-2 नियम 4(2) के तहत परीक्षण। नियम 4(2)(ख)(एक) - मांगी गयी सूचना में ऐसे अनुपलब्ध आंकडों का नया संग्रह किया जाना अन्तर्वलित नही होना चाहिए जिनकों उपलब्ध कराना किसी अधिनियम अथवा लोक प्राधिकरण के किसी नियम या विनियम के अन्तर्गत अपेक्षित नही है।  नियम 4(2)(ख)(दो)- मांगी गयी सूचना में विद्यमान आंकड़ों का नये सिरे से निर्वचन या विश्लेषण करने या विद्यमान आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालने या धारणा बनाने या परामर्श या राय देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। नियम 4(2)(ख)(तीन)- मांगी गयी सूचना में काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर प्रदान करना अन्तर्ग्रस्त नहीं होना चाहिए। नियम 4(2)(ख)(चार)- मांगी गयी सूचना में प्रश्न ’’क्यों’’ जिसके माध्यम से किसी काय के किय जाने अथवा न किये जाने के औचित्य की माॅग की गयी हो, का उत्तर दिया जाना अन्तग्र्रस्त नहीं होना चाहिए। नियम 4(2)(ख)(पाॅच)- सूचना इतनी विस्तृत नहीं होनी चाहिए किस उसके संकलन में संसाधनों का अननुपाती रुप से विचलन अन्तग्र्रस्त हो जाने के कारण सम्बन्धित लोक प्राधिकरण की दक्षता प्रभावित हो जाय। नियम 4(2) के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध में पाॅच सौ से अधिक शब्द नहीं होने चाहिए। यदि वांछित सूचना का कुछ भाग दो या दो से अधिक लोक प्राधिकरणों से सम्बन्धित है तो स्वयं के लोक प्राधिकरण से जुड़ी सूचना उपलब्ध कराते हुए आवेदक को परामर्श दिया जायेगा कि शेष सूचना सम्बन्धित लोक प्राधिकरणों में अलग-अलग आवेदन जमाकर प्राप्त कर लें। जन सूचना अधिकारी का प्रथम दायित्व नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराना है। यदि अधिनियम व नियमावली के अनुसार देय सूचनाएं उपलब्ध नही कराते तो दण्ड के भागी होंगे। अधिनियम एवं नियमावली के नियमों का विचलन न करते हुए जन सूचना अधिकारी सभी देय सूचनायं आवेदक को उपलब्ध करायेगा। जन सूचना अधिकारी अधिनियम व नियमावली के उपबन्धों के अनुरुप समय सीमा के अन्दर सूचना देने या न देने का निर्णय लेगा। जन सूचना अधिकारी बिना किसी विधिक कारण के आवेदन को निरस्त नही करेगा। आवेदनों का सही व संतोषजनक निराकरण हेतु जन सूचना अधिकारी समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों, सूचना आयोग व न्यायालयों के निर्णयों से अद्यतन रहते हुए अनुपालन करेगा। 
बिना तर्कसंगत कारणों से यदि आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है या जानबूझकर भ्रामक या अपूर्ण सूचना दी गयी हो या सूचना को नष्ट किया गया हो या सूचना देने में बाधा उत्पन्न की गयी हो, तो धारा 20(1) के तहत 250/- से 25000/- तक दण्ड तथा धारा 20(2) के तहत अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है। प्रथम अपील की प्रक्रिया - नियम 7(1)- जन सूचना अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट होने की दशा में आवेदक 30 दिनों के भीतर प्रारुप 13 पर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। यह अपील सादे कागज पर भी प्रारुप 13 के विवरण सहित दायर की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकारी का दायित्व है कि अपील के अनुरोध की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर या अपवाद की स्थिति में 45 दिनों के भीतर दोनों/तीनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपना निर्णय दे। यदि अपवाद की स्थिति में 30 दिनों से अधिक का समय लिया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकारी को चाहिए कि वह विलम्ब के कारणों को लिखित रुप में दर्ज करे। यदि अपीलीय प्राधिकारी को लगे कि जन सूचना अधिकारी उसके निर्णय को कार्यन्वित नहीं कर रहा है, तो उसे चाहिए  िकवह मामले को ऐसे उच्चाधिकारी के ध्यान में लाये तो जन सूचना अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने में सक्षम हो। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आलोक सिंह, सीएमओ ओपी सिंह, एडीएम द्वय आरपी मिश्र, रामआसरे सिंह, जिला सेवायोजन अधिकारी राजीव कुमार सिंह, अधि.अभि.लोनिवि केजी सारस्वत, डीएसओ अजय प्रताप सिंह, डीएसटीओ रामदरश यादव आदि जनसूचना अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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