मानदेय की मार या सरकारी उदासीनता?
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रोजगार सेवक की मौत के बाद सरकार एवं अधिकारियों पर उठे सवाल
घटना के 15 दिन पहले वीडियो के माध्यम से गीत गाकर मृतक ने पीड़ा को किया था सार्वजनिक
बरसठी, जौनपुर। स्थानीय विकास खण्ड के ग्राम पंचायत भौरास में तैनात रोजगार सेवक सूबेदार यादव की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कि पिछले 7-8 महीनों से विकास खण्ड के रोजगार सेवकों को मानदेय नहीं मिला था जिससे आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा था।
बताया जाता है कि बीते 21 जून की मौत के करीब 15 दिन पहले सूबेदार यादव ने एक वीडियो के माध्यम से गीत गाकर अपनी पीड़ा और मानदेय न मिलने से उत्पन्न परेशानियों को सार्वजनिक किया था। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनकी मौत के बाद परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
वहीं लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मानदेय भुगतान और समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया गया होता तो शायद आज एक परिवार अपने मुखिया को न खोता। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन तमाम कर्मचारियों की पीड़ा को उजागर करती है जो महीनों से मानदेय के इंतजार में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस दर्दनाक घटना से सबक लेकर जिम्मेदारी तय करता है या फिर एक और परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर होगा? फिलहाल इण्टरमीडिएट व हाईस्कूल पास दो बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
बताया जाता है कि बीते 21 जून की मौत के करीब 15 दिन पहले सूबेदार यादव ने एक वीडियो के माध्यम से गीत गाकर अपनी पीड़ा और मानदेय न मिलने से उत्पन्न परेशानियों को सार्वजनिक किया था। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनकी मौत के बाद परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
वहीं लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मानदेय भुगतान और समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया गया होता तो शायद आज एक परिवार अपने मुखिया को न खोता। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन तमाम कर्मचारियों की पीड़ा को उजागर करती है जो महीनों से मानदेय के इंतजार में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस दर्दनाक घटना से सबक लेकर जिम्मेदारी तय करता है या फिर एक और परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर होगा? फिलहाल इण्टरमीडिएट व हाईस्कूल पास दो बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
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