रात के सन्नाटे को चीरती हुई तेज आवाज के बाद मच गया कोहराम , चीख पुकार से दहला जनमानस

जौनपुर। घनी आबादी वाले रौजा अर्जन मोहल्ले में रात के सन्नाटे को चीरती हुई तेज आवाज के बाद मोहल्ले वासियो जो मंजर देखा वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था । उस वक्त करीब 11 बजे थे। अधिकतर लोग नींद के आगोश में थे और बाकी सोने की तैयारी कर रहे थे। अचानक जोरदार भड़ाम की आवाज से मोहल्ले में कोहराम मच गया।

 घबराकर लोग घरों से बाहर निकले तो गर्द व गुबार देख समझ ही नहीं सके कि क्या हुआ है। बस चीखें सुनाई पड़ रही थीं। गुबार छटां तो देखा दिवंगत हो चुके सगे भाइयों कमरुद्दीन व जमालुद्दीन का पुश्तैनी जर्जर सात दशक पुराना घर मलबे में तब्दील हो गया था। उनके सटे पड़ोसी राजमिस्त्री अजीमुल्लाह का टिनशेड भी मलबे के नीचे दबा था। मलबे में दबे दोनों भाइयों के स्वजन की कराह उठ रही थी। किसी का शरीर ईंटों के नीचे दबा हुआ था तो कोई गृहस्थी के सामान में फंसा निकलने की कोशिश कर रहा था। कई मलबे में दबकर नजर ही नहीं आ रहे थे। सभासद साजिद अलीम ने तुरंत जिला व पुलिस प्रशासन को हादसे की सूचना दी। जब तक सरकारी अमला पहुंचता मोहल्लेवासियों को लेकर राहत व बचाव कार्य में जुट गए। शिक्षक शाहिद अलीम, तुफेल अहमद, आसिफ, राजिक, इफ्तेखारूल, सर्फुद्दीन, अब्दुल्लाह, नजमी आदि मलबा हटाने लगे।
 डीएम मनीष कुमार वर्मा, सदर तहसील के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल, एएसपी (सिटी) डा. संजय कुमार, सीओ सिटी जितेंद्र दुबे, सीओ सदर रणविजय सिंह सदलबल पहुंच गए। करीब दो घंटे के अथक प्रयास के बाद छह लोगों शन्नो, चांदनी, हेरा, स्नेहा, गयासुद्दीन व असीसुद्दीन को निकाल कर जिला अस्पताल भेजा। स्वजन ने बताया कि अभी भी पांच लोग मलबे में दबे हुए हैं। तब जेसीबी व मोहल्लेवासियों की मदद से बड़ी सावधानी से मलबा हटाकर मरणासन्न हाल में संजीदा, अजीमुल्लाह, सैफ कैफ व मिस्बां को निकाला जा सका। जिला अस्पताल पहुंचाने पर डाक्टरों ने सभी को देखते ही मृत घोषित कर दिया।

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