भदोही का नाम बदलने से कालीन उद्योग की ब्रांडिंग को फायदा

भदोही। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने प्रदेश के संतरविदासनगर जिले का नाम पिछले दिनों पलट कर फिर भदोही कर दिया हैं । तत्कालीन मायावती सरकार भदोही का नाम संतरविदास नगर रख दिया था। जिससे कालीन की ब्रांडिंग में निर्यातकों को दिक्कत हो रही थी। फैसले से भदोही का खोया गौरव लौटा दिया है। हलांकि सरकार के इस फैसले की बसपा और दूसरे दलों की तरफ से सरकार की आलोचना भी की जा रही है। लेकिन कालीन उद्योग से जुड़े निर्यातक और दूसरे लोग सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इससे कालीन निर्यात के क्षेत्र में भदोही की खोयी पहचान दोबारा वापस हो गई है। क्योंकि कालीन निर्यात की जीआई भदोही के नाम से मिली है। 
1997 में तत्कालीन मायावती सरकार ने भदोही जिले के नाम के आगे संतरविदास नगर जोड़ दिया था। हलांकि यह सरकार का कोई नीतिगत फैसला नहीं कहा जा सकता था लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए सरकार ने ऐसा कर दिया था। उस समय भी सरकार के इस फैसले की भत्र्सना की गई थी। भदोही का नाम परिवर्तित किए जाने से कालीन उद्योग से जुड़े निर्यातकों को काफी परेशानी होती थी। कालीन उद्योग से जुड़े निर्यातकों का कहना था कि जब कालीन विदेशों में निर्यात होती थी तो संतरविदासनगर लिखा होता था हालंाकि भदोही जुड़ा होता था लेकिन ब्रांडिंग में भारी दिक्कत आती थी। बायरों को बार-बार भदोही निर्मित होने का भरोसा दिलाना पड़ता था। कभी-कभी कई कागजात भी संतरविदास नगर के बजाय संत कबीर नगर पहुंच जाते थे। इसे लेकर लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती थी। सीईपीसी के पूर्व चयरमैन सिद्धनाथ सिंह के विचार में नाम परिवर्तन से बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन कुछ दिक्कतें होती थी। वहीं कालीन निर्यातक तनवीर हुसैन का मानना है कि यह फैसला उद्योग के हित में है। भदोही के कालीन की दुनिया में अपनी अलग पहचान हैं कालीन निर्यात की जो डीआई मिली थी। वह भदोही के नाम से मिली थी। इस फैसले से भदोही की ब्रांडिंग वापस लौट आयी है। अब निर्यातकों को बार-बार बताना नहीं पड़ेगा कि यह कालीन भदोही की ही बनी हैं। यह अच्छा फैसला है। जबकि बसपा से जुड़े लोग नाम परिवर्तन को गलत बताया है। इसे लोग संतरविदास का का अपमान बता रहे हैं। बसपा ने इसका विरोध किया हैं। हलांकि कुल मिलाकर कालीन निर्यातकों को लाभ पहुंचा है। वहीं यहां की आम जनता भी लंबा नाम पंसद नहीं करती थी। राजनीति से इतर लोगों ने सरकार के फैसले उचित बताया है।

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