कर्बला के शहीद शश्माहे अली असगर की याद में हुआ नौहा-मातम
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जौनपुर। अंजुमन हुसैनिया बलुआघाट की ऐतिहासिक तरही आल इण्डिया शब्बेदारी रविवार को मकबूल मंजिल में सम्पन्न हुई जहां देश की आधे दर्जन मातमी अंजुमनों के अलावा शहर की प्रमुख अंजुमनों ने पूरी रात कर्बला के सबसे कमसिन शहीद 6 माह के अली असगर की याद में अपने दर्द भरे कलाम पेश कर नजराने अकीदत पेश किया। अलविदाई मजलिस के बाद गहवारे अली असगर व अलम ताबूत को निकला जिसकी जियारत हेतु हजारों लोग मौजूद रहे। इसके पूर्व शनिवार को तिलावते कलाम-ए-पाक के शब्बेदारी का आगाज हुआ जहां आसिफ बिजनौरी, शोला जौनपुरी, शोहरत जौनपुरी आदि ने कलाम पेश किये। सोजखानी बुलन्दशहर से आये जामीन शिकारपुरी व मोहम्मद निशात जौनपुरी ने पढ़ा। मजलिस को खेताब करते हुये हरिद्वार मंगलोर से आये मौलाना सैयद मेराज मेंहदी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन के सबसे छोटे बेटे अली असगर को यजीदी फौजों ने उस समय कर्बला के मैदान में तीर चलाकर इमाम के हाथों में शहीद कर दिया जब वे इस बच्चे के लिये 2 कतरा पानी पिलाने के लिये मंाग रहे थे। इस दर्दनाक घटना को सुनकर लोग रोने लगे। इसके बाद शिकारपुर बुलन्दशहर से आयी अंजुमन ने अपने दर्द भरे नौहे पेश करके पूरा माहौल गमकीन कर दिया। अंजुमन पंजतनी सुल्तानपुर, हुसैनिया जलालपुर अम्बेडकरनगर, सादात बारा, जानसट मुजफ्फरनगर, अजंुमन जाफरिया इलाहाबाद व अंजुमन असगरिया मुजफ्फरनगर के मशहूर नौहेखां काशिफ ककरौली ने अपने दर्द भरे नौहे पढ़कर कर्बला के इस कमसिन शहीद को नजराने अकीदत पेश किया। अलविदाई मजलिस शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफुजूल हसन खां ने पढ़ा जिसके बाद शबीहे ताबूत अलम व झूला अली असगर निकाला गया। शब्बेदारी का संचालन जाहिद बलरामपुरी ने किया। इस मौके पर डा. जौहर अली खान, कैसर नकवी, अली बाकर, शहंशाह हुसैन, माजिद हसन, साजिद हसन, मीजम हसन, पूर्व सभासद शाहिद मेंहदी, डा. इन्तेजार मेंहदी, कैफी रिजवी, नवाज हसन, एनुल हसन, सै. शहादुल हसन, अनवर हसन खां, सै. अरशद अब्बास, तौकीर हसन, नफीस हैदर, सादिक मेंहदी, हसनैन कमर दीपू, आरिफ हुसैनी, कुमेल मेहदी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। महासचिव जहीर हसन ने आभार प्रकट किया।
