सूर्य की किरणों पर ठंड पड़ी भारी
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_987.html
जौनपुर। ठंड में दिनों दिन बढ़ोत्तरी होने से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो
गया है। शनिवार की सुबह तक पूरा जनपद कोहरे की चादर से ढका रहा। पारा लुढ़क
रहा है। जिससे लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। कोहरे
के कारण ट्रेनों का आवागमन भी प्रभावित हो गया है।
सुबह करीब नौ बजे तक कोहरे ने पूरे जिले को अपने आगोश में ले रखा था। फुहार के रूप में पानी की बूदें गिर रही थीं। कोहरे से सद्भावना पुल, शाही पुल व कुछ दूरी तक चलने वाले लोग नहीं दिखाई पड़ रहे है। इसके अलावा लोगों को वाहन चलाने में काफी दिक्कत हो रही थी। कोहरा में लाइट जलने से रात का अहसास हो रहा था। वहीं ग्रामीण इलाकों में पूरी तरह से लोगों की हालत खराब हो रही है। दोपहर बाद हल्की धूप होने के बाद भी चलने वाली हवाओं से लोग ठंड की चपेट में आ रहे है। इसमें बुजुर्गो व बच्चों को काफी समस्या हो रही है।
ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। दोपहर में सूर्य देव के दर्शन अवश्य हुए किंतु उनकी किरणों पर ठंड भारी पड़ती नजर आई। कोहरा, गलन और ठिठुरन के कारण अलाव जलाकर तापने के लिए कोयले और लकड़ी की दुकानों पर बिक्री ज्यादा होने लगी है। कई स्थानों पर तो प्रतिदिन की अपेक्षा ज्यादा दामों पर बिक्री मांग के अनुरूप की जा रही थी। जगह-जगह अलाव के सामने ही लाग खड़े और बैठे रहे। सड़कों पर आवाजाही कम रही। बसों में भी पर्याप्त यात्री नहीं रहे। स्कूलों में छात्र सिकुड़ते हुए जा रहे थे। शाम और सुबह तो सड़कों पर सन्नाटा ही पसरा रहा। वहीं जिला प्रशासन द्वारा अलाव की कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है और न ही रैन बसेरा खोला गया है।
सुबह करीब नौ बजे तक कोहरे ने पूरे जिले को अपने आगोश में ले रखा था। फुहार के रूप में पानी की बूदें गिर रही थीं। कोहरे से सद्भावना पुल, शाही पुल व कुछ दूरी तक चलने वाले लोग नहीं दिखाई पड़ रहे है। इसके अलावा लोगों को वाहन चलाने में काफी दिक्कत हो रही थी। कोहरा में लाइट जलने से रात का अहसास हो रहा था। वहीं ग्रामीण इलाकों में पूरी तरह से लोगों की हालत खराब हो रही है। दोपहर बाद हल्की धूप होने के बाद भी चलने वाली हवाओं से लोग ठंड की चपेट में आ रहे है। इसमें बुजुर्गो व बच्चों को काफी समस्या हो रही है।
ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। दोपहर में सूर्य देव के दर्शन अवश्य हुए किंतु उनकी किरणों पर ठंड भारी पड़ती नजर आई। कोहरा, गलन और ठिठुरन के कारण अलाव जलाकर तापने के लिए कोयले और लकड़ी की दुकानों पर बिक्री ज्यादा होने लगी है। कई स्थानों पर तो प्रतिदिन की अपेक्षा ज्यादा दामों पर बिक्री मांग के अनुरूप की जा रही थी। जगह-जगह अलाव के सामने ही लाग खड़े और बैठे रहे। सड़कों पर आवाजाही कम रही। बसों में भी पर्याप्त यात्री नहीं रहे। स्कूलों में छात्र सिकुड़ते हुए जा रहे थे। शाम और सुबह तो सड़कों पर सन्नाटा ही पसरा रहा। वहीं जिला प्रशासन द्वारा अलाव की कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है और न ही रैन बसेरा खोला गया है।

