सुन्नतों को छोड़ चुका है मुसलमान : अजहर मदनी
https://www.shirazehind.com/2015/10/blog-post_716.html
जलसे में जुटे गैर जनपद के मौलाना और नातख्वां
तारापुर तकिया पर आयोजित हुआ दसवीं मुहर्रम का जलसा
जौनपुर। नगर के तारापुर ताकिया स्थित मदरसे जामियातुश्शैख असअद अल मदनी में शनिवार को जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में गैर जनपद से आए मौलाना और नातख्वां ने अपने कलाम पेश किए। देर शाम तक चले इस जलसे में शहर भर के लोगों ने हिस्सा लेकर सवाबे दारैन हासिल किया। जलसे का खेताब करते हुए देवबंद से तशरीफ लाए मौलाना अजहर मदनी ने कहा कि आज दुनिया भर के मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। हर ओर मुसलमान परेशान किए जा रहे हैं। उसकी सिर्फ यही वजह कि मुसलमान अल्लाह के रास्ते से हट गया है।
मौलाना अजहर ने आगे कहा कि मुसलमान हुजूर सल्ललाहु अलैहे वसल्लम के बताए रास्ते को छोड़ चुका है। अगर यही आलम रहा तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भर से मुसलमानों को मिटा दिया जाएगा। सिर्फ माहे मुहर्रम ही नहीं साल भर के 365 दिनों में कोई भी दिन ऐसा नहीं है जिसमें सहाबा इकराम शहीद न किए गए हों। मौलाना अंसार अहमद रामपुरी ने माहे मुहर्रम की फजीलत बयान करते हुए कहा कि सिर्फ हजरते हुसैन रजि0 ही माहे मुहर्रम में शहीद नहीं हुए बल्कि हजरते उमर फारूक रजि0 भी शहीद किए गए। लेकिन लोगों को आज उनकी शहादत का पता ही नहीं है। ये हम मुसलमानों की कमी है कि हमंे इतने बड़े सहाबी के यौमे शहादत का इल्म नहीं है। हजरते उमर फारूक की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि उनको आप सल्ललाहु अलैहिवसल्लम ने अल्लाह से मांग लिया था। ताकि इस्लाम को इनके जरिए मजबूती मिल सके। डा अब्दुस्सलाम नदवी ने जलसे को खेताब करते हुए कहा कि मुसलमानों को कुरान और हदीस के रास्ते पर अमल करना चाहिए। यही उनके दीन और दुनिया की कामयाबी की कुंजी है। अगर मुसलमान कुरान और हदीस से हट जाएगा तो समझ लिए उनकी बर्बादी तय है। हाफिज अब्दुर्रहीम शीराजी ने कहा कि हजरते आदम अलैहिस्सलाम की तौबा दस मुहर्रम को ही कबूल हुई थी। हजरते यूनुस अलैहिस्सलाम को मछली के पेट से आज के ही दिन निजात मिली थी। हजरते नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती आज ही की दिन जूदी पहाड़ पर टिकी। हजरते मूसा अलैहिस्सलाम को आज ही के दिन फिरऔन से निजात मिली। कारी महमूद बलियावी ने नाितया कलाम चमन-चमन बहार है, कली-कली निखार है, रूतों में भी खुमार है, हवा भी मुश्कबार है पेश किया। जलसे के बाद मदरसे में बनी मस्जिद का असर की नमाज से उद्घाटन किया गया। जलसे की नेजामत जामिया हुसैन की उस्ताद सलमान महमूद ने की। इस दौरान असलम इंजीनियर, मिर्जा दावर बेग, डाॅ जाफरी, अनवारूल हक गुड्डू, मौलाना तौकीर अहमद, मुनव्वर अंसारी, मौलाना समीर, हाजी असरार अहमद, मौलाना अबुल बशर आदि लोग मौजूद रहे।
तारापुर तकिया पर आयोजित हुआ दसवीं मुहर्रम का जलसा
जौनपुर। नगर के तारापुर ताकिया स्थित मदरसे जामियातुश्शैख असअद अल मदनी में शनिवार को जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में गैर जनपद से आए मौलाना और नातख्वां ने अपने कलाम पेश किए। देर शाम तक चले इस जलसे में शहर भर के लोगों ने हिस्सा लेकर सवाबे दारैन हासिल किया। जलसे का खेताब करते हुए देवबंद से तशरीफ लाए मौलाना अजहर मदनी ने कहा कि आज दुनिया भर के मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। हर ओर मुसलमान परेशान किए जा रहे हैं। उसकी सिर्फ यही वजह कि मुसलमान अल्लाह के रास्ते से हट गया है।
मौलाना अजहर ने आगे कहा कि मुसलमान हुजूर सल्ललाहु अलैहे वसल्लम के बताए रास्ते को छोड़ चुका है। अगर यही आलम रहा तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भर से मुसलमानों को मिटा दिया जाएगा। सिर्फ माहे मुहर्रम ही नहीं साल भर के 365 दिनों में कोई भी दिन ऐसा नहीं है जिसमें सहाबा इकराम शहीद न किए गए हों। मौलाना अंसार अहमद रामपुरी ने माहे मुहर्रम की फजीलत बयान करते हुए कहा कि सिर्फ हजरते हुसैन रजि0 ही माहे मुहर्रम में शहीद नहीं हुए बल्कि हजरते उमर फारूक रजि0 भी शहीद किए गए। लेकिन लोगों को आज उनकी शहादत का पता ही नहीं है। ये हम मुसलमानों की कमी है कि हमंे इतने बड़े सहाबी के यौमे शहादत का इल्म नहीं है। हजरते उमर फारूक की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि उनको आप सल्ललाहु अलैहिवसल्लम ने अल्लाह से मांग लिया था। ताकि इस्लाम को इनके जरिए मजबूती मिल सके। डा अब्दुस्सलाम नदवी ने जलसे को खेताब करते हुए कहा कि मुसलमानों को कुरान और हदीस के रास्ते पर अमल करना चाहिए। यही उनके दीन और दुनिया की कामयाबी की कुंजी है। अगर मुसलमान कुरान और हदीस से हट जाएगा तो समझ लिए उनकी बर्बादी तय है। हाफिज अब्दुर्रहीम शीराजी ने कहा कि हजरते आदम अलैहिस्सलाम की तौबा दस मुहर्रम को ही कबूल हुई थी। हजरते यूनुस अलैहिस्सलाम को मछली के पेट से आज के ही दिन निजात मिली थी। हजरते नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती आज ही की दिन जूदी पहाड़ पर टिकी। हजरते मूसा अलैहिस्सलाम को आज ही के दिन फिरऔन से निजात मिली। कारी महमूद बलियावी ने नाितया कलाम चमन-चमन बहार है, कली-कली निखार है, रूतों में भी खुमार है, हवा भी मुश्कबार है पेश किया। जलसे के बाद मदरसे में बनी मस्जिद का असर की नमाज से उद्घाटन किया गया। जलसे की नेजामत जामिया हुसैन की उस्ताद सलमान महमूद ने की। इस दौरान असलम इंजीनियर, मिर्जा दावर बेग, डाॅ जाफरी, अनवारूल हक गुड्डू, मौलाना तौकीर अहमद, मुनव्वर अंसारी, मौलाना समीर, हाजी असरार अहमद, मौलाना अबुल बशर आदि लोग मौजूद रहे।

