प्यासा है शेर घाट का रस्ता न रोकना.............

 जौनपुर । प्यासा है शेर घाट का रस्ता न रोकना , अब्बास है जलाल में हरगिज़ न टोकना , ये मातमी सदा कठघरा इमाम चौक से  मंगलवार छठी मुहर्रम को हज़रत इमाम हुसैन के भाई हुसैनी लश्कर के अलमदार हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत की याद में निकले  मातमी जुलुस में  अंजुमने पढ़ कर नज़राने अकीदत पेश कर रही थी । कठघरा इमाम चौक से निकले इस जुलुस की मजलिस को अज़ादारी काउन्सिल के अध्यक्ष मोहम्मद हसन नसीम ने ख़िताब करते हुए कर्बला की दास्ताँ बयान करते हुए कहा की इमाम हुसैन हज़रत मोहम्मद साहेब के मज़हब इस्लाम को बचाने के लिए कर्बला में अपने नन्हे नन्हे बच्चों के साथ 72 लोगो की अज़ीम शहादत दी । उन्होंने कहा की कर्बला की जंग में इमाम हुसैन के छोटे भाई गाज़ी अब्बास जब अपनी 4 साल की भतीजी सकीना के लिए पानी लेने गए उसी समय ज़ालिम यज़ीदियो ने उन्हें घेर कर उनके दोनों हाथ काट कर शहीद कर दिया । मसाएब का ये दास्ताँ सुनकर मजलिस में मौजूद लोग दहाड़े मारकर रोते बिलखते देखे गए । मजलिस की सोज़खानी डॉ एबाद और उनके हमनवा ने किया । बाद खत्म मजलुस अंजुमन कौसरिया ने अलम का विशाल मातमी जुलुस निकाला जो अपना कदीम रास्ता बदलापुर पड़ाव , ओलंदगंज , नखास गली , शाही पुल , कसेरी बाजार , चाहरसू , हरलालका रोड , कल्लू का इमामबाड़ा , अबीरगढ़ टोला होते हुए हमाम दरवाज़ा स्थित मौलाना शमीम आलम के इमाम बारगाह में जाकर सम्पन्न हुआ । इस मौके पर नगर की 15 मातमी अंजुमनों ने नौहा व मातम किया । वही कुछ अंजुमनों ने ज़ंजीर और छुरों का मातम कर अपने को लहूलुहान कर लिया । इस मौके पर अज़ादारी काउन्सिल के महासचिव मिर्ज़ा जावेद सुल्तान , सभासद मुकेश सिंह , मिर्ज़ा मोहम्मद बाकर , फौजी मुगल , हैदर मेहदी बाबू , मिर्ज़ा ज़ियारत हुसैन , मिर्ज़ा मुश्ताक , मिर्ज़ा रुशेद रज़ा , तहसीन शहीद , ज़ीशान हैदर बबलू , शहज़ादे , रफत  आदि के साथ हज़ारो की संख्या में लोग मौजूद रहे ।

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