दैवीय आपदा से जूझ रहे किसानों का बैंक व प्रशासन कर रहा शोषण
https://www.shirazehind.com/2015/10/blog-post_892.html
जौनपुर। दैवीय आपदा से निरन्तर जूझते किसान के घाव पर मरहम लगाना तो दूर, उल्टे उन्हें कृषि ऋण के रूप में बैंक से कर्ज लेने पर बैंकों द्वारा आरसी भेजकर उत्पीड़न की कार्यवाही तेज कर दी गयी है। पहले दैवीय आपदा एवं बाद में सूखे की मार से टूट चुके किसानों को सरकारी सहायता तो मिली नहीं, ऊपर से दैवीय आपदा और सूखे की भेंट चढ़ चुके किसान भविष्य में भी बैंक का कर्ज अदा करने में मजबूर हैं लेकिन वसूली के नाम पर उनका उत्पीड़न तेज कर दिया गया है। सरकार यदि ऐसी स्थिति में तत्काल रोक लगाकर किसानों को राहत प्रदान नहीं करती है तो उत्पीड़न से त्रस्त होकर वे आत्महत्या जैसी घटना को अंजाम देने को मजबूर हो सकते हैं। सूत्रों की मानें सरकारी कर्ज के बोझ तले दबे किसान उत्पीड़न की भयावह कार्यवाही से त्रस्त होकर पलायन की तरफ कदम बढ़ाने के साथ अनिश्चय के दौर से गुजरते हुये भारी मानसिक तनाव के चलते कोई भी अप्रिय कदम उठा सकते हैं। समय रहते सरकार और प्रशासन किसानों के हित में गम्भीर कदम उठायें, अन्यथा काफी देर हो चुकी होगी।
