शोधकर्ता की भूमिका अन्य विधियों की तुलना में अधिक सक्रिय होती है

 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के कान्फ्रेंस हाल में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. सी.बी. द्विवेदी ने शोध में प्रयुक्त होने वाली गुणात्मक विधियों पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणात्मक विधियों के अपने लाभ है। यह विधि वास्तविकता के काफी नजदीक है और यह मानव व्यवहार को उसके वातावरण, परिप्रेक्ष्य एवं संस्कृति की दृष्टि से देखने का प्रयास करता है। इसमें शोधकर्ता की भूमिका अन्य विधियों की तुलना में अधिक सक्रिय होती है।
प्रो. द्विवेदी ने कथानक विश्लेषण, टेक्स्ट विश्लेषण, विमर्श विश्लेषण, एथनोग्राफी आदि गुणात्मक विधियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि गुणात्मक विधियां मात्रात्मक विधियों के साथ उपयोग में लायी जा सकती है और ये शोध को सम्पूर्णता प्रदान करती है। गुणात्मक विधियां छोटे प्रतिदर्श के लिए प्रयोग में लायी जाती है जबकि मात्रात्मक विधियां बड़े प्रतिदर्श के लिए प्रयोग में लायी जाती है। गुणात्मक विधियों का सामाजिक विज्ञान के शोधों में वृहद स्तर पर प्रयोग किया जा रहा है। इससे शोध मानव जीवन की वास्तविकता के विभिन्न आयामों को समझने में सफल रहा है। उन्होंने गुणात्मक विधियों के दार्शनिक मूल एवं स्रोतों पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर डा. अजय प्रताप सिंह, डा. एचसी पुरोहित, प्रो. आरएस सिंह, डा. आशुतोष सिंह, सुशील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. रुश्दा आजमी, डा. सुभाष वर्मा, डा. हरिकेश और विभाग के शोध विद्यार्थी मौजूद रहे।

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