झोपड़ी में स्थापित है पुलिस चौकी, दारोगा और सिपाहियों को र्दुघना होने का लगा रहता डर
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जौनपुर में एक पुलिस चौकी झोपड़ी में चल रही है। यह अजूबी चौकी किसी दूर दराज के इलाके में नही बल्की लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थापित है। इसी रास्ते से नेता मंत्री और पुलिस के अलाधिकारी गुजरते है इसके बाद भी किसी की नजर इस पुलिस चौकी पर नही पड़ी। इस चौकी तैनात दारोगा और सिपाही अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर है ही साथ सरकारी दस्तावेज भी असुरक्षित है।
जौनपुर लखनऊ हाईवे पर स्थित यह धनियांमऊ पुलिस चौकी पिछले 16 वर्षो से इसी तरह चल रही है कड़ाके की ठण्ड हो या झमाझम बारिश का मौसम या जेठ की दुपहरिया की लू थपेड़े को झेलते हुए इस चौकी पर तैनात दारोगा और पुलिस काम करने को मजबूर है। हैरत की बात यह है कि इसी रास्ते से सत्ता में बैठे मंत्री नेता और पुलिस के आलाधिकारी गुजरते है इस पर नजर किसी की नही पड़ी। मौजूदा चौकी इंचार्ज ने कहा कि हम लोग इसी तरह अपना काम करते रहते है। साथ में यह भी डर लगता है कि कही कोई अनियंत्रित ट्रक या बस किसी दिन हमारी चौकी न घुस जाय। दारोगा ने यह भी कहा कि यहां पर इतनी कम जगह है कि आने वाले फरियादी को ठीक से बैठा नही सकता उनकी समस्या सुनना तो दूर की बात है। उन्होने कहा कि हमारे क्षेत्र में कुल 29 गांव आता है जिसकी आबादी करीब 50 हजार है। जनता की सुरक्षा के लिए यहां पर कुल एक दारोगा दो हेड कास्टेबल और दस पुलिस जवानो का पद है लेकिन चौकी का भवन न होने के कारण मात्र एक दारोगा और तीन सिपाही तैनात है। उन्होने ने कहा कि अगर सरकार हमे जमीन मुहैया करा दे तो भवन हम जनता के सहयोग से निर्माण करा सकते है।
पुलिस चौकी यह दुर्दशा भले ही मंत्री और अधिकारियों न दिखाई दे लेकिन इसका दर्द स्थानीय जनता को बहुत है। सभी ने कहा कि हम लोगो को पुलिस जवानो की पेरशानियां देखी नही जाती।
जौनपुर लखनऊ हाईवे पर स्थित यह धनियांमऊ पुलिस चौकी पिछले 16 वर्षो से इसी तरह चल रही है कड़ाके की ठण्ड हो या झमाझम बारिश का मौसम या जेठ की दुपहरिया की लू थपेड़े को झेलते हुए इस चौकी पर तैनात दारोगा और पुलिस काम करने को मजबूर है। हैरत की बात यह है कि इसी रास्ते से सत्ता में बैठे मंत्री नेता और पुलिस के आलाधिकारी गुजरते है इस पर नजर किसी की नही पड़ी। मौजूदा चौकी इंचार्ज ने कहा कि हम लोग इसी तरह अपना काम करते रहते है। साथ में यह भी डर लगता है कि कही कोई अनियंत्रित ट्रक या बस किसी दिन हमारी चौकी न घुस जाय। दारोगा ने यह भी कहा कि यहां पर इतनी कम जगह है कि आने वाले फरियादी को ठीक से बैठा नही सकता उनकी समस्या सुनना तो दूर की बात है। उन्होने कहा कि हमारे क्षेत्र में कुल 29 गांव आता है जिसकी आबादी करीब 50 हजार है। जनता की सुरक्षा के लिए यहां पर कुल एक दारोगा दो हेड कास्टेबल और दस पुलिस जवानो का पद है लेकिन चौकी का भवन न होने के कारण मात्र एक दारोगा और तीन सिपाही तैनात है। उन्होने ने कहा कि अगर सरकार हमे जमीन मुहैया करा दे तो भवन हम जनता के सहयोग से निर्माण करा सकते है।
पुलिस चौकी यह दुर्दशा भले ही मंत्री और अधिकारियों न दिखाई दे लेकिन इसका दर्द स्थानीय जनता को बहुत है। सभी ने कहा कि हम लोगो को पुलिस जवानो की पेरशानियां देखी नही जाती।

