ईष्टमुखी होने से मानव का सर्वागीण विकास

श्रीश्री ठाकुर का धूम-धाम से मना जन्मोत्सव
जौनपुर। युग पुरूषोत्तम श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चन्द का 128 वां जन्म महोत्सव समारोह रविवार को स्थानीय सत्संग केन्द्र कमलानगर हुसैनाबाद में धूम-धाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्रीश्री ठाकुर की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। सत्संग केन्द्र से निकाली गयी शोभायात्राकलेक्ट्री तिराहा से होकर स्टेट बैंक होते हुए थाना लाइन बाजार से भ्रमण करती हुई वापस लौटी। इसमें गाजे बाजे के साथ बन्दे पुरूषोत्तम, राधे बोल, राधे बोल, हरिबोल हरि बोल के भजन पर अनुयायी नाचते गाते और उल्लासपूर्ण चल रहे थे । सड़कोें के किनारे लोग शोभा यात्रा की अंगवानी कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सवेरे चार से वेद मांगलिक शहनाई, ऊषा कीर्तन के साथ शुरू हो गया था। शोभा यात्रा के बाद विनती प्रार्थना एर्व धर्म ग्रन्थ पाठ एवं भजन हुआ। इसके बाद धर्म सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टण्डन, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह तथा अध्यक्षता दरभंगा के एपीआर सुशील सिंह ने किया। सभा को सम्बोधित करते हुए विद्वान वक्ताओं ने ठाकुर जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके द्वारा बताये गये यजन, याजन और ईष्टभृत्ति और नामजप के सिद्धान्तों पर चलकर समष्टिगत समस्याओं का चरम समाधान हो सकता है। सबके मूल में चाहिए ईष्टानुराग। अनुरक्त हृदय से उन्हे अनुशरण करने पर मनुष्य प्रकृत मंगल का अधिकारी होगा ही। उन्होने बताया कि व्यक्ति दो प्रकार से अपना जीवन व्यतीत करता है। एक मनमुखी दूसरा ईष्टमुखी या आदर्श मुखी जीवन। मनमुखी चलन से व्यक्ति पतनोन्मुख हो जाता है जबकि आदर्श चलन से व्यक्ति का सर्वागीण विकास होता है। मन को नियंत्रित करने की विधि एक सिद्ध पुरूष व गृहस्थ गुरू ही अपने आचरण से बता सकता है। ठाकुर जी ने कहा है कि मुझे जंगल में रहने वाला सन्यायी नहीं गृहस्थ जीवन का सन्यासी चाहिए। आज मानव को मानव मानव बनाने की आवश्यकता है और वह दीक्षा और सद्मार्ग से ही संभव है। आज कोई ऐसा विश्वविद्यालय या संस्था नहीं है जो मानव बनाने का प्रयास करे लेकिन सत्संग के माध्यम से ऐसा संभव है। ठाकुरजी कहते है कि यदि मन से आशा और तृष्णा समाप्त नही हुई तो भजन के लिए आसन लगाने से कुछ लाभ नहीं होगा। मातृ सभा में ठाकुर जी द्वारा बताये गये सिद्धान्तों के बारे में बताया गया कि जब तक पत्नी का पति में अटूट प्रेम नहीं रहेगा तब तक सुसंतान की प्राप्ति नहीं हो सकती। सुसंतान के लिए एकनिष्ठ होना जरूरी है। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने दीक्षा लेकर ठाकुर के बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सभा को केन्द्रीय सत्संग देवघर झारखण्ड से आये प्रदीप भट्टाचार्य, शैलेन्द्र कुमार, हरिशंकर जैजैराम सहित अन्य वक्ताओं ने सम्बोधित किया। संचालन एसपीआर काली प्रसाद सिंह व आभार डा0 निखिलेश श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर विभिन्न जनपदों तथा जिले के सुदूर क्षेत्रों से आये हजारों नेजन्मोत्सव की महत्ता को आत्सात किया। आनन्द बाजार के साथ समारोह का समापन हुआ।


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