बाल श्रम रोकने के लिए हुआ मंथन
https://www.shirazehind.com/2016/03/blog-post_508.html
जौनपुर। आज बाल श्रम के संदर्भ में प्रशिक्षण एवं जागरूकता
उत्पन्न करने के लिए कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह मुख्य विकास अधिकारी पीसी
श्रीवास्तव की अध्यक्षता में प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया
गया। अतिथियों को बुके देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम यूनीसेफ के सहयोग
से सम्पन्न हुआ। यूनीसेफ से रावेन्द्र सिंह जादौन ने चलचित्र में माध्यम से
बाल श्रम के रोकथाम के लिए विस्तार से व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। मुख्य
विकास अधिकारी पीसी श्रीवास्तव ने बाल श्रम प्रथा के बारे में बताया कि
माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश 22 मई 2008 राष्ट्रीय
मांनवाधिकार आयोग के अनुपालन में बाल श्रमिकों का चिन्हांकन, शैक्षणिक
पूनर्वासन एवं परिवारों का आर्थिक पूनर्वासन के सम्बन्ध में विस्तार से
जानकारी दिया तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में कही भी बाल
श्रमिक पाये जाय तो सम्बन्धित विभाग को अवगत कराये। इस कार्य में सरकारी
अधिकारी/स्वयं सेवी संगठनों के पद्ाधिकारियों एवं आम नागरिक के सहयोग से ही
सफल हो सकता है। सहायक श्रम आयुक्त बीएन दुबे ने कार्यक्रम का सफल संचालन
करते हुए अपने विभागीय दायित्वों के बारे में एवं टास्कफोर्स सदस्यों के
जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दिया। उपस्थित लोगों से बाल
श्रम के बारे में प्रश्न पूछे गये जिन्हे मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने
उचित जबाब भी दिया। बाल न्यायाधीश संजय उपाध्याय ने बताया कि अपने प्रदेश
के ही नही अन्य प्रदेशों से भी बाल श्रमिक जिले में मेरे समक्ष प्रस्तुत
किये गये जिन्हे अभिभावक/रामनगर बाल संरक्षण गृह भेजा गया है। इस अवसर पर
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा नेम सिंह, लीड बैंक अधिकारी अमित सेन गुप्ता,
जिला प्रोबेशन अधिकारी अशोक सोनकर, डूडा अधिकारी एमपी सिंह, पुलिस निरीक्षक
ओमकार सिंह, डा. अविनाश पार्थडिकर, श्रम प्रर्वतन अधिकारी एसएन सिंह, बीएन
चौबे, सर्वेश चतुर्वेदी, आदि ने बाल श्रम के बारे में अपने बहुमूल्य सुझाव
दिये।
