'रिस्क की आस में रौजे पर है बैठा सूरज, अब तो शब्बीर ही चाहे तो सवेरा होगा"
https://www.shirazehind.com/2016/07/blog-post_327.html
जफराबाद,
जौनपुर। स्थानीय नगर पंचायत क्षेत्र के मोहल्ला नासही के इमामबाड़ा
हुसैनिया में गुरुवार की देर शाम जश्ने इमामे हुसैन व ईद मिल समारोह का
आयोजन किया गया। इस मौके पर इमाम हुसैन की याद में एक महफिल इनकाद किया
गया। लखनऊ से आये शायर मिर्जा लखनवी ने 'ये तशौव्वर में भी आदा ने भी न
सोचा होगा, हुरमुला तीरे तब्बसुम का निशाना होगा" पेश किया तो उपस्थित
लोगों ने वाह-वाह किया। शायद निसार जफराबादी ने पेश किया 'घट गयी होगी तेरी
शान उसी वक्त फोराद, जब जरी ने तूझे कुजे में समेटा होगा"। वाकार
सुल्तानपुरी ने 'सात मातम का जो अल्लाह का सजदा होगा, ये अमल आपका सोने पर
सुहागा होगा" पेश कर खूब वाहवाही लूटी। शायर अजादार अजमी ने 'रिस्क की आस
में रौजे पर है बैठा सूरज, अब तो शब्बीर ही चाहे तो सवेरा होगा" पेश कर
लोगों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया। मेयार जलवरी ने 'उंगलियां फिर
तेरे किरदार पर उठ सकती नहीं, पढ़ के एकबार जरा जेयारत देखो"। लखनऊ से आये
शायर मीसम काजमी, जफर नजफी, अंजार सीतापुरी, अम्बर बनारसी, जुहैर
बाराबंकवी, ख्वाहिश बनारसी, अल्ताफ कलापुरी, हैदर शिराजी और मुकामी शायरों
ने अपने-अपने कलाम पेश किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता वशीर आब्दी ने किया।
इस मौके पर औसाफ हुसैन, वैश मंेहदी, हैदर रजा, शमीम, शकील, मोहम्मद रजा,
राजू, गुड्डू सहित कई लोग मौजूद रहे।

