कम आय दिखाकर ठेका चलाने की साजिश
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जौनपुर। देश का रेलवे नेटवर्क दिन प्रतिदिन नई बुलन्दियों को छूने की ओर जहां तेजी से अग्रसर होता जा रहा है वहीं पूर्वांचल का केराकत रेलवे स्टेशन बदहाली का शिकार बना हुआ है। रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के क्रम में जहां हर स्टेशन पर तेजी से काम हो रहा है तो केराकत रेलवे स्टेशन आज भी बाबा आदम के जमाने वाले ढर्रे पर चल रहा है। टिकट वितरण का कार्य ठेके पर होने के कारण ठेकेदार की मनमानी चलती है। टिकट वितरण का ग्राफ कम दिखाया जाता है ताकि उनका ठेका बरकरार रहे ऐसा यात्रियों का आरोप है। छोटी रेल लाईन से बड़ी रेल लाईन में परिर्वतित होने के बाद अब जहां इस रेल मार्ग के दोहरीकरण सहित विधुतीकरण की मंजूरी मिल चुकी है वहीं स्टेशन की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है गाड़ी आने के चंद मिनट पहले टिकट वितरण शुरू किया जाता है और गाड़ी जाते ही बंद कर दिया जाता है जिससे काफी संख्या में लोग टिकट लेने से वंचित रह जाते है जिससे कभी-कभी उन्हें यात्रा के दौरान टिकट चेकर के कोपभाजन का शिकार होना पड़ जाता है। ज्ञात हो कि एक दशक पूर्व इस मार्ग पर चलने वाली कोयला गाड़ी को बंद करने के बाद जब डीजल इंजन गाड़ी का प्रचलन प्रारंभ किया था तो उसी के कुछ समय बाद आधुनिकरण के बजाए जौनपुर से औड़िहार के बीच के स्टेषनों को रेल महकमें के अधिकारियों ने घाटा दिखाते हुए उजाड़ दिया था, बल्कि यहां तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों का अन्यत्र स्थानान्तरण भी कर दिया गया था। स्टेशन के संचालन का कमा ठेके पर दे दिया गया था। तभी से स्टेशनों की बदहाली दिनों दिन जहां बढ़ती ही गई बल्कि अराजकता का भी बोलबाला बढ़ उठा। हाल के दिनों में रेल महकमें ने इस मार्ग की सुधि लेते हुए तथा औड़िहार-वाराणसी मार्ग में गंगा-गोमती नदी के पुराने पुल की जर्जरता को देखते हुए गोंदियां समेत कुछ गाड़ियों के मार्ग में परिर्वतन करते हुए इस मार्ग से गुजारना प्रारंभ किया तो इस मार्ग के भाग्य बहुरने लगे, लेकिन टिकट व्यवस्था की बदहाली और ठेका प्रथा अभी कायम होने से यात्रियों को जो परेशानी हो रही है उससे राहत नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि ठेका बरकरार रहे इसके लिए एक सोची समझी साजिश के तहत आमदनी को कम दिखाकर रेलवे की आंखों में धूंल झांेका जा रहा है।

