गठबन्धन होने पर सपा नहीं छोड़ेगी सदर सीट
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जौनपुरै। सपा काग्रेस में यदि गठबंधन हुआ तो भी जौनपुर सदर सीट नहीं सपा नहीं छोड़गी । 32 वर्षों में पहली बार सदर सीट पर कांग्रेस की मामूली वोटों से इस बार जीत हुई थी । गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर के बयानों से नदीम जावेद के खेमे में मायूसी छाई है । आगामी विधान सभा चुनाव में कांग्रेस - सपा गठबंधन के बलबूते ए बार फिर नदीम जावेद विधायक बनना चाहते है। जौनपुर सदर सीट पर 1980 के बाद से हुए चुनाव में 8 में से 6 बार गैर भाजपा और गैर कांग्रेस के विधायक जीत चुके हैं चुनाव । 2002 में भाजपा और 2012 में कांग्रेस के खाते में जा सकी है यह सीट। कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर द्वारा सपा - कांग्रेस गठबंधन की बात को एक सिरे से ख़ारिज करने के बयान से जौनपुर के कांग्रेस विधायक के खेमे में उदासी छाई हुई है । क्योंकि कांग्रेस विधायक नदीम जावेद और उनके समर्थक अब तक 100 प्रतिशत आश्वस्त थे कि गठबंधन में यह सीट उन्हें ही मिलेगी और गठबंधन के सहारे वे इस बार विधान सभा पहुच जायेंगे। सपा सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस - सपा गठबन्धन हुआ तो भी जौनपुर सदर सीट समाजवादी पार्टी नहीं छोड़ेगी । पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि सदर सीट पर 1984 के बाद से कांग्रेस पहली बार जीती है जबकि 6 बार गैर कांग्रेसी व् गैर भाजपाई विधायक चुने गए हैं । आजादी के बाद से ही जिले की प्रतिष्ठा परक जौनपुर सदर सीट हमेशा से चर्चा में रही है । चार दशक पूर्व जनसंघ से राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे राजा जौनपुर व कांग्रेस से हरगोविंद सिंह के बीच रोचक मुकाबला रहा हो या 1974 में समाजवादी आंदोलन के अगुआ जय प्रकाश नारायण के शिष्य व् पूर्व प्रधानमन्त्री चन्द्र शेखर जी के करीबी मित्र ओम प्रकाश श्रीवास्तव के चुनाव जीतने की घटना रही हो । आपात काल के बाद 1980 में कांग्रेस से कमला सिंह ने इस सीट से चुनाव जीतकर सभी को हैरानी में डाल दिया। इसके बाद तो जौनपुर सदर सीट से कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ हो गया। तीन दशक बाद 2012 में कांग्रेस से नदीम जावेद ने मामूली मतों से जीत दर्ज की । हार जीत का अंतर इतना अधिक था कि कांग्रेस के मतगणना एजेंट को तो छोड़िये खुद कांग्रेस प्रत्याशी और उनके समर्थक भी आधी मतगणना के बाद मतगणना टेबल छोड़कर भाग लिए थे। क्योंकि मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट न देकर सपा को वोट दिया था । इस चुनाव में शहर के भाजपा के मतदाताओं ने बसपा को हराने के लिए बड़ी उम्मीद से कांग्रेस प्रत्याशी नदीम जावेद को वोट दिया था । विधायक नदीम जावेद को भी इस बार हार का डर सता रहा है । खुद नदीम जावेद और उनके लोग भी जानते हैं कि सपा- कांग्रेस गठबंधन से ही वे फिर से विधायक बन सकते हैं ।

