होलिका जलायें पर पर्यावरण भी बचायें

जौनपुर। अर्से से गांवों और शहरों में होलिका जलाने के लिए लोग हरे पेड़ों की कटान कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में यह एक बड़ी समस्या बनकर सामने आएगी। ऐसे में हमें पर्यावरण को बचाने और नफरत की होलिका जलाने का संकल्प लेना चाहिए। शिक्षक राम प्रताप सिंह ने कहा कि होलिका दहन के माध्यम से समाज की बुराइयों को जलाने की जरूरत है। लोगों को अपने अहंकार को दहन करना चाहिए। लेकिन कई बार लोग पर्यावरण की रखवाली करने वाले पेड़ पौधों को ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। पेड़ों का संरक्षण कर ही हम पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं पत्रकार रामदयाल द्विेवेदी ने कहा कि होलिका दहन के माध्यम से समाज की बुराइयों को जलाने की जरूरत है। लोगों को अपने अहंकार को दहन करना चाहिए। लेकिन कई बार लोग पर्यावरण की रखवाली करने वाले पेड़ पौधों को ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। पेड़ों का संरक्षण कर ही हम पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। शिक्षक ज्ञानेन्द्र शर्मा ने कहा कि आज जहां देखो उधर ही होलिका जलाई जा रही है। इसके कारण ढेर सारी लकड़ियां सिर्फ परंपरा के नाम पर स्वाहा हो जाती है, जो गलत है। हालांकि होलिका दहन के नाम पर हरे पेड़ों को जलाने से परहेज करने का संकल्प लेना चाहिए। डा. श्याम उपाध्याय ने कहा कि इकोफ्रेंडली होली मनाने का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के हरे पेड़ों को नहीं बल्कि घर के कूड़ा करकट को एकत्रित कर के होलिका जलानी चाहिए। साथ ही रंगों की जगह अबीर व गुलाल से होली खेलनी चाहिए।डा. रवि त्रिपाठी ने कहा कि पर्यावरण को बचाएं और नफरत की होलिका जलाएं। हमारी संस्कृति में होलिका दहन की परंपरा काफी पुरानी है। लेकिन धीरे-धीरे दहन का स्वरूप भी बदलते जा रहे हैं। लोग होलिका दहन में हरे पेड़ पौधे जला रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे बचना चाहिए।

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