शाहगंज सीट पर बना है स्थानीय बनाम बाहरी मुद्दा
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जौनपुर। शाहगंज सीट पर इस बार दिलचस्प लड़ाई दिखाई पड़ रहा है। इस विधानसभा पर लगातार तीन बार जीत की हैट्रिक लगाने वाले उर्जा एवं नियोजन राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव ललई समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी है। भाजपा-भासपा गठबंधन से राणा अजीत प्रताप सिंह और बसपा से ओपी सिंह चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है। उधर पूर्व सांसद उमाकांत यादव के पुत्र दिनेशकांत यादव राष्ट्रीय लोकदल से चुनाव लड़ रहे है। बसपा और भाजपा-भासपा प्रत्याशी दोनो सुल्तानपुर जिले के है। इस लिए यहां पर स्थानीय बनाम बाहरी मुद्दा भी बन गया है। फिलहाल तीनो प्रत्याशी अपनी अपनी जीत दर्ज करने के लिए जनता के दरबार में जाकर हाजिरी लगा रहे है।
इस सीट पर सपा प्रत्याशी व सूबे के उर्जा एवं नियोजन राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव ललई लगातर 15 वर्षो से यहा का प्रतिनिधित्व कर रहे है जिसके कारण जनता में उनकी पैठ अच्छी है। ललई यादव 2002 विधानसभा चुनाव में पहली बार खुटहन सीट पर बसपा से चुनाव लड़ा था। पहली ही बार ही उन्होने बाजी मारते हुए विधायक बने उसके बाद ललई ने बसपा का दामन छोड़कर साईकिल पर सवार हो गये। मुलायम सिंह यादव ने उन्हे अपनी सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री बनाया था। 2007 विधानसभा चुनाव में सपा से फिर इसी सीट पर चुनाव जीतकर विधायक चुने गये। 2012 चुनाव में ललई यादव शाहगंज सीट पर सपा का परचम लहराते हुए लगातार तीसरी बार विधायक चुने गये। एक फिर ललई यादव चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है। उधर भाजपा-भासपा प्रत्याशी दोनो दलो के बदौलत काफी मजबूती से मैदान में डटे है। बसपा प्रत्याशी दलित वोट बैंक के सहारे अपनी नौका पार लगाने के फिराक में है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी दिनेशकांत यादव अपने पिता की विरासत वापस लाने के लिए कड़ी मशक्त कर रहे है। फिलहाल किसकी किस्मत में क्या लिखा है यह तो 11 मार्च को मतगणना के बाद ही पता चल पायेगा।
इस सीट पर सपा प्रत्याशी व सूबे के उर्जा एवं नियोजन राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव ललई लगातर 15 वर्षो से यहा का प्रतिनिधित्व कर रहे है जिसके कारण जनता में उनकी पैठ अच्छी है। ललई यादव 2002 विधानसभा चुनाव में पहली बार खुटहन सीट पर बसपा से चुनाव लड़ा था। पहली ही बार ही उन्होने बाजी मारते हुए विधायक बने उसके बाद ललई ने बसपा का दामन छोड़कर साईकिल पर सवार हो गये। मुलायम सिंह यादव ने उन्हे अपनी सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री बनाया था। 2007 विधानसभा चुनाव में सपा से फिर इसी सीट पर चुनाव जीतकर विधायक चुने गये। 2012 चुनाव में ललई यादव शाहगंज सीट पर सपा का परचम लहराते हुए लगातार तीसरी बार विधायक चुने गये। एक फिर ललई यादव चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है। उधर भाजपा-भासपा प्रत्याशी दोनो दलो के बदौलत काफी मजबूती से मैदान में डटे है। बसपा प्रत्याशी दलित वोट बैंक के सहारे अपनी नौका पार लगाने के फिराक में है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी दिनेशकांत यादव अपने पिता की विरासत वापस लाने के लिए कड़ी मशक्त कर रहे है। फिलहाल किसकी किस्मत में क्या लिखा है यह तो 11 मार्च को मतगणना के बाद ही पता चल पायेगा।
