गेहूं पर फैसले से किसान खुश तो कुछ मायूस
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जौनपुर। योगी सरकार में कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने नई गेहूं क्रय नीति को मंजूरी दी है। किसानों के लिए 1735 रुपये प्रति कुंतल समर्थन मूल्य घोषित किया है। इसके साथ ही 10 रुपये उतराई भी तय की है। यह भी घोषणा हुई कि धान क्रय केन्द्रों की तरह ही गेहूं क्रय केन्द्र भी खोले जाएंगे। सरकार के इस फैसले की कुछ किसानों ने सराहना की है तो कुछ ने छलावा बताया है। भाकियू नेता राजनाथ यादव सरकार की घोषणा को पूरी तरह नाकाफी मानते हैं। उनका कहना है कि बिजली, पानी, बीज, यूरिया व डीजल आदि के मूल्य दोगुने होने के बाद गेहूं का घोषित मूल्य 1735 रुपये काफी कम है। किसान को कम से कम 2200 रुपये प्रति कुंतल मूल्य मिलना चाहिए। केवल किसान ही ऐसा उत्पादक है जिसे लागत मूल्य में वृद्धि के हिसाब से उत्पाद की कीमत नहीं मिल पाती। मछली शहर तहसील के कादनपुर निवासी किसान रमेश चन्द प्रदेश सरकार के कदम को सराहनीय बताते हुए मानते हैं कि इससे किसान को खुले बाजार में बिचैलिए से होने वाले शोषण से मुक्ति मिलेगी। आनलाइन रजिस्ट्रेशन से भी किसान को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे किसान का गेहूं उत्पादन के प्रति आकर्षण बरकरार रह सकेगा। पर्याप्त खरीद केंद्रों की व्यवस्था से भी किसान को काफी राहत मिलेगी। ग्राम दाउदपुर निवासी गेहूं किसान अनिल कुमार कहते हैं कि प्राकृतिक आपदा व लागत मूल्य में बेतहाशा वृद्धि के बावजूद उचित मूल्य न मिल पाने से किसान की गेहूं उत्पादन में रुचि लगातार घट रही है। सरकार के कदम से गेहूं उत्पादकों को राहत मिलेगी। 72 घंटे में आन लाइन भुगतान से भी किसान को काफी राहत मिलेगी। सरकारी योजना में भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी। गेहूं उत्पादक छाछो गंाव निवसी निवासी रमाशंकर शुक्ल सरकार के कदम को ऊंट के मुंह में जीरे के समान मानते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार की घोषणा न तो किसान को उत्पाद का लागत मूल्य से डेढ़ गुना दिलाने और न ही आय दोगुना करने पर फिट बैठती है। बिजली की बढ़ी दरें किसान का बजट बिगाड़ चुकी हैं। गेहूं का मूल्य हर हाल में दो हजार रुपये प्रति कुंतल से अधिक मिलना ही चाहिए।

