छप्परों में लगी आग, बालक जिन्दा जला
https://www.shirazehind.com/2018/03/blog-post_839.html
जौनपुर। महराजगंज थाना क्षेत्र के बरचौली गांव की दलित बस्ती में
मंगलवार की आधी रात तीन रिहायशी मड़हे में लगी आग में दस वर्ष का बालक जिन्दा
जल गया। परिवार के अन्य सदस्यों ने भाग कर जान बचाई। पीड़ित परिवार की
गृहस्थी तबाह हो गई। खुले आसमान के नीचे आ गए परिवार के पास न खाने को अन्न
बचा न तन ढकने को कपड़े। तहसील प्रशासन ने पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये
की सहायता जल्द दिलाने का आश्वासन दिया है।
पेशे से दिहाड़ी मजदूर वीरेंद्र गौतम का मड़हा रात करीब साढ़े बारह बजे अचानक धू-धू कर जलने लगा। मड़हे में वीरेंद्र की मां नन्हका और उसके चार बेटे दीपक, अनमोल, आयुष और अंश सोए थे। आग लगने के कुछ ही देर बाद आंख खुल जाने पर नन्हका देवी, आयुष, दीपक और अंश निकल कर जान बचाने के लिए भागे लेकिन दस वर्षीय अनमोल भाग नहीं सका। तत्काल किसी का उसकी तरफ ध्यान भी नहीं गया। नन्हका देवी और बच्चों की चीख-पुकार सुनकर बगल के मड़हे में सो रहे वीरेंद्र और उसकी पत्नी सुगना देवी भी आकर मदद की गुहार लगाने लगी। गांव में अफरा- तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर वीरेंद्र गौतम के दूसरे मड़हे तथा पड़ोसी कमलेश के भी मड़हे को जद में ले लिया। बस्ती के लोग नहर से पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास करने लगे। जब तक आग बुझाई गई बालक जिन्दा जल चुका था। दोनों मड़हों में मौजूद पूरी गृहस्थी नष्ट हो गई। अनमोल की बुरी तरह से झुलसी लाश देखते ही घर में कोहराम मच गया। परिजन के करुण क्रंदन से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। वीरेंद्र गौतम ने कहा कि आग बुझाने के दौरान मची अफरा-तफरी में किसी का ध्यान अनमोल के आग में फंसे होने की तरफ गया ही नहीं। पता चल गया होता तो उसे बचा लिया गया होता। ग्रामीणों की सूचना पर आग की विनाशलीला के बीच मौके पर पहुंचे यूपी-100 पुलिस के जवान बेबस दिखे। तीनों मड़हों के खाक होने से उसमें मौजूद कपड़े, अनाज, बिस्तर, पंखा, साइकिल, मोबाइल सहित गृहस्थी के अन्य सामान नष्ट हो गए। खबर मिलने पर बुधवार की सुबह मौका मुआयना करने राजस्व कर्मियों के साथ आए नायब तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत चार लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
पेशे से दिहाड़ी मजदूर वीरेंद्र गौतम का मड़हा रात करीब साढ़े बारह बजे अचानक धू-धू कर जलने लगा। मड़हे में वीरेंद्र की मां नन्हका और उसके चार बेटे दीपक, अनमोल, आयुष और अंश सोए थे। आग लगने के कुछ ही देर बाद आंख खुल जाने पर नन्हका देवी, आयुष, दीपक और अंश निकल कर जान बचाने के लिए भागे लेकिन दस वर्षीय अनमोल भाग नहीं सका। तत्काल किसी का उसकी तरफ ध्यान भी नहीं गया। नन्हका देवी और बच्चों की चीख-पुकार सुनकर बगल के मड़हे में सो रहे वीरेंद्र और उसकी पत्नी सुगना देवी भी आकर मदद की गुहार लगाने लगी। गांव में अफरा- तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर वीरेंद्र गौतम के दूसरे मड़हे तथा पड़ोसी कमलेश के भी मड़हे को जद में ले लिया। बस्ती के लोग नहर से पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास करने लगे। जब तक आग बुझाई गई बालक जिन्दा जल चुका था। दोनों मड़हों में मौजूद पूरी गृहस्थी नष्ट हो गई। अनमोल की बुरी तरह से झुलसी लाश देखते ही घर में कोहराम मच गया। परिजन के करुण क्रंदन से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। वीरेंद्र गौतम ने कहा कि आग बुझाने के दौरान मची अफरा-तफरी में किसी का ध्यान अनमोल के आग में फंसे होने की तरफ गया ही नहीं। पता चल गया होता तो उसे बचा लिया गया होता। ग्रामीणों की सूचना पर आग की विनाशलीला के बीच मौके पर पहुंचे यूपी-100 पुलिस के जवान बेबस दिखे। तीनों मड़हों के खाक होने से उसमें मौजूद कपड़े, अनाज, बिस्तर, पंखा, साइकिल, मोबाइल सहित गृहस्थी के अन्य सामान नष्ट हो गए। खबर मिलने पर बुधवार की सुबह मौका मुआयना करने राजस्व कर्मियों के साथ आए नायब तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत चार लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।

