गांवो मे स्वच्छ पानी मिलना नसीब नहीं
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जौनपुर । गांवों की स्वच्छता से जिले को स्वच्छ होने का नम्बर मिलना है। इसको लेकर जिम्मेदार तनिक भी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। गांवों में गंदगी का आलम यह है कि लोगों को जलभराव के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है। अधिकांश गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब मिलते हैं। जो हैंडपंप चालू भी हैं उनके आसपास गंदगी की भरमार रहती है। क्योंकि पक्का चबूतरा न बना होने से गंदा पानी नल के पास ही जमा रहता है। जिसे पीकर लोग पेट की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। वहीं छोटे नलों का पानी भी बीमारियों का कारण बन रहा है। गांवों में हैंडपंप लगवाने वाली संस्था चबूतरा नहीं बनवाती है। हैंडपंप के पास पक्का चबूतरा न बनने से पानी जमा होता है। गंदगी से भूमिगत पानी भी दूषित हो जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार सजगता नहीं दिखा रहे हैं। हैंडपंप के पास जमा होने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण भी नहीं किया जाता है। जिले के गांवों में शुद्ध पेयजल की सबसे अधिक दिक्कत होती है। गर्मी के दिनों में अधिकतर हैंडपंप पानी उगलना बंद कर देते हैं। जबकि बारिश के दिनों में गांवों में पानी भर जाने से हैंडपंप दूषित पानी उगलने लगते हैं। जिले के 700 से ग्राम पंचायतों में एक हजार हैंडपंप खराब है। पांच सौ से अधिक हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं। इनके मरम्मत का कार्य हर माह कागज पर ही पूरा कर लिया जाता है। अधिशासी अभियंता जल निगम का कहना है कि हैंडपंपों के रिबोर के लिए निर्देश दिए गए हैं। ग्राम प्रधानों से हैंडपंपों के रखरखाव के लिए सहयोग की अपील की गई है।

