धन उगाही के आरोपी कर्मचारी के विरूद्ध नही दर्ज की प्राथमिकी
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जौनपुर। पवारा थाना क्षेत्र के करौदा गाव में ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा सीज की गई कोटे की दुकान को बहाल कराने के लिए तहसीलदार के अर्दली पर तीन महीने पहले धन लेने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाया गया है।कोटेदार के बचाव के लिए की गई धन उगाही की शिकायत पर जिलाधिकारी मौके पर सम्बंधित कर्मचारी की तलाशी करवाये थे तो पांच हजार रुपये जेब से बरामद होने पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश पवारा थानाध्यक्ष को दिया था।पवारा थाने की पुलिस मामले को तीन महीने से लटकाए है अभी तक प्राथमिकी दर्ज नही हुई हैं। 24 अगस्त दिन गुरुवार को उक्त गाव में हाईकोर्ट के निर्देश पर जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी प्रशासनिक अमले के साथ भूमि विवाद सुलझाने गए थे।उसी दौरान ग्रामीणों ने खाद्यान्न वितरण में अनियमितता करने की शिकायत डी एम से की तो वे कोटे की दुकान पर जा धमके।वहां पर जाच में अनियमितता पाए जाने पर दुकान सीज कर दिया।कोटेदार ने वहाँ मौजूद तहसीलदार मछलीशहर के अर्दली से सम्पर्क किया तो उसने पेसे की डिमांड की। ग्रामीणों के अनुसार कोटेदार ने 5000रुपए अर्दली की जेब मे डाल दिया।जब इसकी भनक ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में डाला।मौके पर मौजूद डी एम द्वारा आरोपी कर्मचारी की तलाशी करायी गई तो5000 रुपये उसके जेब से बरामद हुआ।जिलाधिकारी ने पवारा थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। तत्कालीन थानाध्यक्ष बी के वर्मा ने मामले की जांच करने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही थी ।सील नोट की फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।तीन माह बाद भी उक्त आरोपी कर्मचारी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज नही हुई।जिलाधिकारी के निर्देश के बाबजूद कार्यवाही का उक्त प्रकरण में न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
