दूषित जल के सेवन से खराब हो रही सेहत
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जौनपुर। शरीर के लिए पानी बहुत जरूरी है। डाक्टरों का कहना है भाग दौड़ भरे जीवन में नियमित स्वच्छ पानी पिया जाए। सेहत को लेकर सावधानी की बहुत जरूरत है। आपकी जरा सी लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। दूषित पानी पीना किसी खतरे को आमंत्रण देने के बराबर है। इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। कई बार तो हालत गंभीर होने पर जान को खतरा हो जाता है। दूषित पानी में छोटे-छोटे जीवाणु होते हैं, जिनसे बीमारी शरीर में प्रवेश करती है। गंदा पानी पीने से बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। दूषित पानी से नहाने से ही कई बीमारियां हो जाती हैं। जैसे त्वचा रोग, खुजली, दाद आदि। शहर के कई इलाकों में दूषित पानी से कई लोग बीमार हैं। नगर के कई मोहल्लों में नगर पालिका द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला पेयजल प्रायः दूषित आता है। कई बार सभासद व नपा के अफसरों से शिकायत की जाती है लेकिन आज तक हल नहीं निकला। अधिकांष लोग पीने के लिए पानी की कैन मंगाते हैं। लोगों का कहना है कि पाइप लाइन जर्जर हो गई है। अक्सर गंदा पानी घर में आता है।
दूषित पानी पीने से पीलिया रोग भी हो सकता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। चाहे वह बच्चा हो या बड़ा। इस रोग से नाखून, आंख, चेहरा पीला पड़ जाता है। भूख खत्म होने लगती है और सिर दर्द व कमजोरी बढ़ती है। दूषित पानी से पेट से संबंधित भी कई बीमारी हो जाती है। पेट में ऐंठन, पेचिश, पेट में दर्द आदि। ऐसे रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसे देखते हुए लगातार नींबू, नमक और चीनी वाला पानी पिलाएं। ओआरएस का घोल देना उपयोगी रहता है। दूषित पानी आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है। जैसे आंख से पानी आना, आंख लाल हो जाना, सूज जाना, जलन होना, कीचड़ आना आदि। कभी-कभी कंजक्टिवाइटिस जैसी आंख की बीमारी भी हो जाती है जो एक दूसरे से फैलती है। दूषित पानी पीने के कारण गले में भी तकलीफ होने लगती है। गले में अंदर सूजन आना, गिल्टियां होना व आवाज भारी होने का कारण भी दूषित पानी भी बनता है। इसके अलावा हाथ पांव में भी सूजन आ जाती है। टायफाइड दूषित पानी से यह रोग होता है। इसमें तेज बुखार रहता है जो कि तीन चार दिन तक रह सकता है। बुखार के चलते कमजोरी महसूस होने लगती है। पानी को उबालकर शुद्ध किया जा सकता है। कोशिश हो कि पानी उबालकर ही पिया जाए। पीने के पानी में फिटकरी का टुकड़ा कुछ देर डाल दें। फिर फिटकरी को निकालकर पानी को हिला दें। कुछ ही पल में पानी में मौजूद गंदगी नीचे बैठ जाएगी और फिर मोटे कपड़े से पानी छान लें। दूषित पानी में तुलसी के पत्तों को डालकर रखें। तुलसी के पत्ते में कीटाणु नष्ट करने की क्षमता होती है।
दूषित पानी पीने से पीलिया रोग भी हो सकता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। चाहे वह बच्चा हो या बड़ा। इस रोग से नाखून, आंख, चेहरा पीला पड़ जाता है। भूख खत्म होने लगती है और सिर दर्द व कमजोरी बढ़ती है। दूषित पानी से पेट से संबंधित भी कई बीमारी हो जाती है। पेट में ऐंठन, पेचिश, पेट में दर्द आदि। ऐसे रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसे देखते हुए लगातार नींबू, नमक और चीनी वाला पानी पिलाएं। ओआरएस का घोल देना उपयोगी रहता है। दूषित पानी आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है। जैसे आंख से पानी आना, आंख लाल हो जाना, सूज जाना, जलन होना, कीचड़ आना आदि। कभी-कभी कंजक्टिवाइटिस जैसी आंख की बीमारी भी हो जाती है जो एक दूसरे से फैलती है। दूषित पानी पीने के कारण गले में भी तकलीफ होने लगती है। गले में अंदर सूजन आना, गिल्टियां होना व आवाज भारी होने का कारण भी दूषित पानी भी बनता है। इसके अलावा हाथ पांव में भी सूजन आ जाती है। टायफाइड दूषित पानी से यह रोग होता है। इसमें तेज बुखार रहता है जो कि तीन चार दिन तक रह सकता है। बुखार के चलते कमजोरी महसूस होने लगती है। पानी को उबालकर शुद्ध किया जा सकता है। कोशिश हो कि पानी उबालकर ही पिया जाए। पीने के पानी में फिटकरी का टुकड़ा कुछ देर डाल दें। फिर फिटकरी को निकालकर पानी को हिला दें। कुछ ही पल में पानी में मौजूद गंदगी नीचे बैठ जाएगी और फिर मोटे कपड़े से पानी छान लें। दूषित पानी में तुलसी के पत्तों को डालकर रखें। तुलसी के पत्ते में कीटाणु नष्ट करने की क्षमता होती है।

