जानिये पूर्व सांसद उमाकांत यादव का राजनीतिक इतिहास

जौनपुर। फर्जी दस्तावेज के सहारे एक महिला की जमीन हड़पने के मामले दोषी ठहराये गये पूर्व बाहुबली सांसद उमाकांत यादव का राजनीतिक इतिहास है। वे 1991 विधानसभा चुनाव में पहलीबार जयराम की दुनियां छोड़कर राजनीति में कदम रख दिया। इस क्षेत्र में उन्हे लगातार सफलता मिलती रही है। 1991 से लेकर सन् 2002 तक खुटहन विधान सभा से चुनाव जीतकर विधायक बनते रहे। 2002 विधानसभा चुनाव में उनकी किस्मत ने साथ नही दिया यह चुनाव वे बसपा प्रत्याशी शैलेन्द्र यादव ललई से बुरी तरह से हार गये। लेकिन ठीक दो वर्ष बाद 2004 लोकसभा चुनाव में उनके लिए अच्छा दिन आ गया यह चुनाव उमाकांत यादव ने बसपा के बैनर तले मछलीशहर लोकसभा से चुनाव लड़ा उन्होने भाजपा प्रत्याशी केशरीनाथ त्रिपाठी को बुरी तरह से हराकर लोकसभा पहुंचे। ठीक दो वर्ष बाद से उनकी किस्मत ने फिर पलटी मार दिया। 2007 विधानसभा में बसपा का शासन आया गया। उस समय उमाकांत पर आजमगढ़ जिले में एक अल्पसंख्यक के मकान पर बुल्डोजर चलवाकर उस पर कब्जा करने का आरोप लगा । इस मामले पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कड़ा रूख अपनाते हुए अपने ही पार्टी के सांसद उमाकांत को लखनऊ स्थित अपने आवास पर बुलवाकर पुलिस के हवाले कर दिया था। 

 बाहुबली नेता उमाकांत यादव पहली बार 1991 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर खुटहन से विधायक चुने गए। इसके बाद 1993 के चुनाव में बसपा व सपा में गठबंधन हुआ तो बसपा ने फिर उमाकांत को खुटहन से अपना उम्मीदवार बनाया। ये चुनाव भी उमाकांत जीत गए। 1996 में विधानसभा चुनाव आया तो उमाकांत ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और फिर जीत ने उनके कदम चूमे। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उमाकांत को मछलीशहर से अपना प्रत्याशी घोषित किया। ये चुनाव भी उमाकांत जेल में रहते हुए भी जीत लिया। साल 2008 के एक आपराधिक मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपने आवास से ही सांसद उमाकांत को गिरफ्तार करवा दिया था।

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