संक्रमित व क्वॉरेंटाइन लोगों को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड कराना होगा कारगर

हिमांशु श्रीवास्तव 
आरोग्य सेतु एप सबसे तेजी से 5 करोड़ बार डाउनलोड किया जाने वाला दुनिया का पहला ऐप

जौनपुर।  कोरोना महामारी  पर रोकथाम  के लिए केंद्र सरकार द्वारा आरोग्य सेतु एप लांच किया गया और लोगों से प्रधानमंत्री ने इसे डाउनलोड करने की अपील की। जीपीएस तकनीक पर काम करने वाले इस ऐप के उपयोगकर्ता को कोविड-19 की जांच में संक्रमित पाया जाता है तो सिस्टम उन सभी को एलर्ट करता है जो उस व्यक्ति के नजदीक संपर्क में आए थे और उन्होंने भी ऐप को डाउनलोड किया है।जब दो पंजीकृत उपयोगकर्ता एक दूसरे के ब्लूटूथ रेंज में आते हैं तो उनके ऐप स्वचालित रूप से डीआईडी और सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं कि दोनों के बीच संपर्क कहां और कितनी देर हुआ।
जिला प्रशासन को चाहिए कि जितने लोग क्वॉरेंटाइन में रखे गए हैं या कोरोना से संक्रमित है,यदि उनके पास स्मार्टफोन है तो उनके मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराएं इससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने की संभावना कम होगी।हाल ही में रिमांड मजिस्ट्रेट समेत पांच लोग इसलिए क्वॉरेंटाइन में भेजे गए क्योंकि बदलापुर का आरोपी रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुआ था और बाद में रिपोर्ट में उसे कोरोना पॉजिटिव निकला यदि मजिस्ट्रेट व अन्य लोग ऐप डाउनलोड किए होते तो उनके मोबाइल पर अलर्ट का मैसेज आ जाता और यदि आरोपी के साथ आईटीआई कॉलेज में क्वॉरेंटाइन में छोड़े गए लोग भी इस ऐप को डाउनलोड किए होते तो उन्हें भी अलर्ट का मैसेज आ जाता और प्रशासन ने उन्हें छोड़कर जो गलती की वह शायद न करता और यहीं पर उन्हें क्वॉरेंटाइन में रखता क्योंकि रिपोर्ट आने के कुछ घंटे पूर्व ही प्रशासन ने कई लोगों को अपने जिलों में जाने के लिए छोड़ दिया था।रिपोर्ट आने के बाद उन जिलों में संपर्क करके उन व्यक्तियों को पुनः क्वॉरेंटाइन में रहने के लिए वहां के डीएम से वार्ता किया।
इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद ब्लूटूथ व जीपीएस ऑन रखा जाता है यदि सभी अपने मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर ले तो यदि वे कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आएंगे तो अलर्ट का मैसेज आने के बाद वे अपनी जांच करा कर इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि उन्हें संक्रमण है या नहीं।ऐप को डाउनलोड करते समय व्यक्ति का नाम,उम्र,पद व बीमारी (बुखार,खांसी या छींक इत्यादि)के संबंध में डिटेल मांगी जाती है।इस ऐप का नकारात्मक पहलू यह है कि बहुत से लोग बीमारी से संबंधित लक्षण पाए जाने के बावजूद सही जानकारी नहीं भरते।उन्हें डर रहता है कि यदि सही जानकारी भर दी जाएगी तो उनकी लोकेशन ट्रैक कर उन्हें टेस्ट के लिए उठा ले जाया जाएगा।दूसरा बहुत से जगह नेट काम नहीं करता इस वजह से भी लोग नहीं भर पाते।बहुत से लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है ऐसे लोग भी इस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर सकते।कुछ लोग डाटा चोरी होने के डर से ऐप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी कोरोना पॉजिटिव लोगों और क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना अनिवार्य किया जा रहा है।ऐप से कोरोना संक्रमित लोगों की गतिविधियों की पूरी जानकारी मिलती रहती है। ऐप को इस आधार पर सेट किया गया है कि अगर दो मोबाइल फोन एक दूसरे के ब्लूटूथ रेंज में है तो उनके उपयोगकर्ता को एक दूसरे के बारे में पता चल जाएगा कि वे कोरोना पीड़ित व्यक्ति के निकट हैं। स्मार्टफोन रखने वाले सभी व्यक्ति यदि सही जानकारी देते हुए इस ऐप का इस्तेमाल करें तो कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। हाल ही में दिल्ली  की एक महिला किराने की दुकान पर गई तो उसके निकट संपर्क में आए एक व्यक्ति के जांच के बाद कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई।महिला का कहना है कि ऐप ने मुझे अलर्ट भेजा क्योंकि इसने मेरी लोकेशन रिकॉर्ड कर ली थी।महिला ने जांच कराई।जांच में उसे संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। बता दें कि ऐप की गोपनीयता नीति में कहा गया है कि सूचनाओं को फोन से 30 दिनों और सरवर से 45 दिनों के बाद हटा दिया जाएगा। उपयोगकर्ता को अगर उस अवधि में जांच में कोरोना से संक्रमित नहीं पाया जाता। जिस उपयोगकर्ता में संक्रमण की पुष्टि हुई उससे जुड़ी सूचनाओं को उसके स्वस्थ होने के 60 दिनों के बाद हटा लिया जाएगा।एक परामर्शदाता का कहना है कि उपयोगकर्ताओं के पास यह जांचने का कोई तरीका नहीं है कि सरकार ने उनका डाटा हटा दिया।भारत में 40 करोड़ से अधिक लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।अगर 50 फीसद भी आरोग्य सेतु को डाउनलोड करते हैं तो इससे काफी लाभ मिल सकता है। जिला प्रशासन को चाहिए कि अन्य उपाय करने के साथ-साथ इस ऐप के प्रति भी लोगों को जागरूक करें और कोरोना संक्रमित तथा क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों को तो विशेष रूप से ऐप डाउनलोड करवाएं।

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