पत्रकार संघ भवन की अधार शिला रखी थी लालजी टण्डन ने
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जौनपुर। मध्यप्रदेश के राज्यपाल व भाजपा के बरिष्ठ नेता स्वर्गीय लालजी टण्डन का जौनपुर से काफी गहरा रिश्ता रहा है। वे जहां पार्टी की मजबूती के लिए जिले में बराबर आते रहे है वही कार्यकर्ताओं के दुःख सुख में शामिल होते रहे है। स्व0 टण्डन ने पत्रकार संघ भवन की अधारशीला भी रखी थी। आज उनकी मौत से पूरा जनपद मर्माहत है।
28 जनवरी 2003 को कलेक्टेªट परिसर स्थित पत्रकार संघ का शिलान्यास तत्कालीन मंत्री आवास एवं नगर विकास मंत्री लालजी टण्डन ने लखनऊ से किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन सांसद स्वामी चिन्मयानंद ने किया था तथा विशिष्ट अतिथि तत्कालीन लघु़ उद्योग मंत्री जगदीश नारायण राय रहे। हलांकि इस भवन की नींव रखने के लिए वे जौनपुर आ रहे थे लेकिन किन्ही कारणो से उनका कार्यक्रम रद्द हो गया था। हम आपको बताते चले कि उस समय सूबे में भाजपा बसपा गठबंधन की सरकार थी।
बाद में कानूनी अड़चनो के कारण इस भवन का नाम बदल कर सार्वजनिक सामुदायिक भवन कर दिया गया।
इस आन्दोलन को धार दिया था लालजी टंडन ने
28 जनवरी 2003 को कलेक्टेªट परिसर स्थित पत्रकार संघ का शिलान्यास तत्कालीन मंत्री आवास एवं नगर विकास मंत्री लालजी टण्डन ने लखनऊ से किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन सांसद स्वामी चिन्मयानंद ने किया था तथा विशिष्ट अतिथि तत्कालीन लघु़ उद्योग मंत्री जगदीश नारायण राय रहे। हलांकि इस भवन की नींव रखने के लिए वे जौनपुर आ रहे थे लेकिन किन्ही कारणो से उनका कार्यक्रम रद्द हो गया था। हम आपको बताते चले कि उस समय सूबे में भाजपा बसपा गठबंधन की सरकार थी।
बाद में कानूनी अड़चनो के कारण इस भवन का नाम बदल कर सार्वजनिक सामुदायिक भवन कर दिया गया।
इस आन्दोलन को धार दिया था लालजी टंडन ने
जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील में कर्मचारियों के दुर्व्यवहार से एक कार्यकर्ता की मौत की खबर के बाद वह लखनऊ से दौड़े चले आए थे। लखनऊ से जौनपुर की लंबी यात्रा में थकान और कमजोरी से उनकी तबीयत भी बिगड़ गई, बावजूद उन्होंने न सिर्फ आंदोलन में हिस्सा लिया, बल्कि सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
यह वाकया वर्ष 2004-05 का है। भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता लालता गिरी किसी काम से मड़ियाहूं तहसील गए थे। वहां कर्मचारियों से बहस हो गई। दुर्व्यवहार से आहत लालता गिरी की तहसील में ही हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा था। कई दिनों तक आंदोलन भी चला।


