कोरोना रुपी बारूद के ढेर पर वकालत करने को मजबूर हैं अधिवक्ता

  
 जौनपुर। कोरोना की रफ्तार एवं मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनपद में चाहे जो भी व्यवस्था करने का दावा किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी कोरोना पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा।इसके पीछे घोर लापरवाही महत्वपूर्ण कारण है।दीवानी न्यायालय में अब तक 6 अधिवक्ता व कई कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।इसके अलावा दीवानी न्यायालय व जिलाधिकारी आवास से चंद कदम की दूरी पर अंबेडकर तिराहे पर भी 4 मरीज पाए जा चुके हैं।इसके बावजूद इस क्षेत्र को सील नहीं किया गया। उसी रास्ते से हजारों अधिवक्ता व वादकारी न्यायालय आते हैं। दीवानी न्यायालय में पहले दिन रैपिड एंटीजन ट्वीट के जरिए हुए मात्र 25 अधिवक्ताओं के टेस्ट में चार अधिवक्ता व कुछ टेस्ट में 2 कर्मचारी पॉजिटिव पाए गए पाए गए।2 दिन कोर्ट बंद की गई सैनिटाइजेशन हुआ इसके बाद पुनः न्यायालय चलने लगा।तमाम अधिवक्ताओं ने इसका विरोध भी किया कि जब 25 टेस्ट में चार अधिवक्ता पॉजिटिव निकले तो हजारों अधिवक्ताओं के टेस्ट में काफी संख्या में अधिवक्ता पॉजिटिव पाए जाएंगे इसलिए या तो न्यायालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाए या ज्यादा से ज्यादा किट मंगा कर सभी अधिवक्ताओं कर्मचारियों व न्यायिक अधिकारियों का कोरोना जांच ही करा लिया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। न ही अंबेडकर तिराहे को ही सील किया गया उसी रास्ते से अधिवक्ता,वादकारी व कर्मचारी दीवानी न्यायालय परिसर में आते हैं।।सोशल डिस्टेंसिंग का पालन असंभव है।अधिवक्ता विनोद श्रीवास्तव,प्रवीण सिंह,बृजेश निषाद,पंकज श्रीवास्तव सुभाष मित्र,सुबेदार यादव आदि अधिवक्ताओं का कहना है कि विभिन्न अदालतों में अलग-अलग तारीख पड़ती है।जमानत पर सुनवाई होती है तो अधिवक्ताओं को मजबूरन कोर्ट में आना ही पड़ता है और वादकारियों को भी मुकदमों के दाखिला व जमानत इत्यादि के लिए न्यायालय में आना मजबूरी है।स्वाभाविक है जहां 8से दस हजार अधिवक्ता व वादकारी 100 मीटर के दायरे में रहेंगे।वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना असंभव है।न्यायालयों में तो इतनी भीड़ हो जाती है कि एक दूसरे से सट कर खड़े रहना मजबूरी बन जाती है। कितने अधिवक्ता व वादकारी उसमें कोरोना पॉजिटिव हैं यह भी किसी को पता नहीं है।संक्रमित लोगों के बीच ही स्वस्थ लोग भी कार्य करके संक्रमित हो जाएंगे।शनिवार को एक पेशकार की पत्नी की कोरोना से मृत्यु के बाद अधिवक्ता समुदाय व कर्मचारी अत्यंत भयभीत हैं। अगर यही स्थिति रही तो हजारों की संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित हो जाएंगे।अधिवक्ता जान जोखिम में लेकर कोर्ट में आने और कार्य करने को मजबूर है।यहां तक की काफी संख्या में बुजुर्ग अधिवक्ता व वादकारी भी न्यायालय आ रहे हैं और कोरोना रूपी बारूद के ढेर पर कार्य कर रहे हैं।वीडियो कांफ्रेंसिंग से घर बैठे जमानत इत्यादि कार्य हो सकता है लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका।

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