जौनपुर महोत्सव में नही सुनाई देंगी जौनपुरी राग , कलाकारों में आक्रोश

 

तबले पर प्रस्तुति देता 9 वर्षीय कलाकार वेदप्रकाश मिश्र
जौनपुर। 26 से 28 मार्च तक होने वाले तीन दिवसीय जौनपुर महोत्सव में राग जौनपुरी की धुन नही सुनाई देगी न ही नन्हे मुन्ने कलाकार अपनी प्रस्तुति नही दे पायेंगे। आयोजको ने बाहरी कलाकारों को अधिक तवज्जो दिया है जिसके कारण स्थानीय कलाकारों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। । करीब एक दर्जन कलाकारो ने पत्रकारों  के समक्ष अपनी पीड़ा बयां किया। हालांकि कलाकारों में आक्रोश की खबर आयोजको तक पहुंचते ही हड़कम्प मच गया , कई कलाकारों को कर्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए फोन भी आने लगा है।

 प्रख्यात तबला वादक व एक मात्र राग जौनपुरी के गायक सूर्यप्रकाश मिश्र उर्फ बल्ला गुरु के आवास पर एक पत्रकार वार्ता में कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। कलाकारों ने बताया कि तीन दिवसीय जौनपुर महोत्सव हो रहा ,इस कार्यक्रम में केवल गिनती के स्थानीय कलाकारों को ही मौका दिया गया है। जबकि पूरे विश्व मे केवल जिले के नाम पर मात्र राग जौनपुरी बना है । आयोजको ने राग जौनपुरी गाने वाले जिले के एक मात्र कलाकार सूर्यप्रकाश मिश्र को भी इस कार्यक्रम से दूर रखा। बल्ला गुरु ने कहा कि बीएसपी सरकार में जौनपुर विरासत महोत्सव का आयोजन हुआ था उस कार्यक्रम मेरे पिता पंडित स्व रामप्रताप मिश्रा को राग जौनपुर गाने के लिए आमंत्रित किया गया था मेरे पिता उस अस्वस्थ्य थे उन्होंने गाने से मना कर दिया था लेकिन तत्कालीन संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय के आग्रह पर उन्होंने जौनपुरी राग गाकर कार्यक्रम का आगाज किया था। उसके बाद से हुए कार्यक्रमों में राग जौनपुरी से आयोजको ने दूरी बना लिया। 

बल्ला गुरु ने इस बार हो रहे तीन दिवसीय जौनपुर महोत्सव में भी मुझे नही बुलाया गया । उन्होंने कहा कि राग जौनपुरी फिल्मों में गजल गायकों व लोकगीत गायक प्रयोग कर रहे है लेकिन अपने जिले में ही इस विधा को बेगाना बनाया जा रहा है। 

मात्र 9 वर्ष के उम्र का तबला वादक वेदप्रकाश मिश्र का कोमल व छोटा हाथ जब तबले पर चलता है तो सुनने वाला झूम उठता है। उसे भी इस कार्यक्रम में मौका नही दिया गया, वेद ने कहा कि यदि मुझे भी आयोजको द्वारा मौका दिया गया होता तो मुझे जनता का आशीर्वाद मिल जाता। 

युवा कलाकार मितुल माहिया ने साफ कहा कि जब जौनपुर महोत्सव हो रहा तो बाहरी कलाकारों का क्या काम है, इस कर्यक्रम में जिले की संस्कृति, विधाएं और लोक कलाओ की प्रस्तुति होनी चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत ही राग जौनपुर से होना चाहिए। उसके बाद हम कलाकारों को मौका देना चाहिए। जब कल शाम से हम लोग चर्चा करना शुरू किया तब जाकर कलाकारों को फोन करके फोटो मांग जा रहा है। इसमें जो स्वाभिमान कलाकार उन्होंने महोत्सव में जाने से मना कर दिया जिन लोगो को लगा मुझे कर्यक्रम में मौका मिल गया है वे लोग जा रहे है। 

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