टिकट में के पड़ी बीस , बिना पुछैय झोकत हउवेन मठाधीश!
जैसे जैसे चुनाव करीब आ रहा है वैसे वैसे चुनावी चक्कलस बढ़ रही है। हर जगह बस एक सवार्ल हो रहा कि भाजपा का टिकट किसको मिल रहा है। अधिकतर लोग कह रहे है कि यह भाजपा है किसी को भी प्रत्याशी बना सकती है जिसका दूर दूर तक नाम ही नही है। पिछले चुनावों का उदाहरण भी देते है कि 2014 लोकसभा चुनाव में अचानक केपी सिंह, 2017 विधानसभा चुनाव में सदर सीट पर गिरीश चंद्र यादव टिकट मिला था । नगर पालिका चुनाव में मनोरमा मौर्या को भाजपा प्रत्याशी बनाकर सबको चैका चुकी है।
कुछ लोगो का मत है कि भारतीय जनता पार्टी पूर्व सांसद केपी सिंह, पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, हरेन्द्र प्रताप सिंह जैसे अपने खाटी कार्यकर्ताओं को ही मैदान में उतार सकती है या उद्योगपति ज्ञानप्रकाश सिंह को दाव पर लगाने जा रही है।
इन जमीनी नेताओं के अलावा कुछ ऐसे दावेदार शामिल है जिनका राजनीति पार्टी से इससे पहले कोई नाता नही था। वे भी अपने आपको प्रबल दावेदार बताते हुए चुनाव मैदान में उतरने के लिए ताल ठोक रहे है। इनकी भी पहली पसंद कमल का फूल ही है। इसमें कोई धन बल तो कोई अपने रसूख के बल पर अपना टिकट पक्का बता रहे है।

