श्रीराम—शबरी की नवधा भक्ति कथा सुनकर श्रोतागण हुये भाव—विभोर

 चौकियां धाम, जौनपुर। मां शीतला चौकियां धाम में चल रहे 5 दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन काशी से पधारे मानस मर्मग्य कथा वाचक मदन मोहन मिश्रा ने अयोध्या काण्ड के कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब देवासुर संग्राम हुआ था तब राजा दशरथ देवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे। यह संग्राम देवों और असुर शंबासुर के बीच हो रहा था। इस युद्ध में राजा दशरथ की सारथी कैकेई बनी थीं। तब युद्ध में राजा दशरथ शस्त्र लगने की वजह से घायल हो थे, तब उनके प्राणों की रक्षा कैकेई ने की थी। तब राजा दशरथ ने कैकेई से खुश होकर कैकेई को दो वरदान मांगने को कहा। तब कैकेई ने राजा दशरथ से कहा कि आप इन वरदानों को धरोवर स्वरूप अपने पास रहने दीजिये। समय आने पर में मांग लूंगी।यह दो वर ही आगे चलकर राम के वनवास के कारक बने। कैकेई के वर उस महान कार्य के निमित्त बने जो प्रभु श्रीराम को रावण के वध के रूप मे किया जिससे पृथ्वी को मुक्ति मिली कथा वाचक अखिलेश चंद्र पाठक (ज्योतिषाचार्य) ने शबरी की नवधा भक्ति कथा प्रसंग भक्ति प्रेम का वर्णन करते हुए बताया कि भगवत्प्रेम का सुंदर स्वरूप जो शबरी ने प्रस्तुत किया, वह किसी के भी हृदय में प्रेम भक्ति का संचार करने में सर्वथा सक्षम है। इसमें जरा भी संदेह नहीं। श्रीराम बोले भामिनि मैं तो केवल भक्ति का ही संबंध मानता हूं। जाति, पाति, कुल, धर्म, बड़ाई, धन-बल, कुटुम्ब, गुण एवं चतुराई इन सबके होने पर भी भक्ति रहित मनुष्य जलहीन बादल सा लगता है। उन्होंने शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश किया। कहा कि मेरी भक्ति नौ प्रकार की है- संतों की संगति अर्थात सत्संग, श्रीराम कथा में प्रेम, गुरुजनों की सेवा, निष्कपट भाव से हरि का गुणगान, पूर्ण विश्वास से श्रीराम नाम जप, इंद्रिय दमन तथा कर्मों से वैराग्य, सबको श्रीराममय जानना, यथा लाभ में संतुष्टि तथा छल रहित सरल स्वभाव से हृदय में प्रभु का विश्वास। इनमें से किसी एक प्रकार की भक्ति वाला मुझे प्रिय होता है, फिर तुझमें तो सभी प्रकार की भक्ति दृढ़ है। अतएवं जो गति योगियों को भी दुर्लभ है, वह आज तेरे लिये सुलभ हो गयी है। उसी के फलस्वरूप तुम्हें मेरे दर्शन हुए जिससे तुम सहज स्वरूप को प्राप्त करोगी। प्रेम भक्ति में रंगी हुई शबरी ने बार-बार प्रभु के चरणों में सिर झुकाकर प्रभु दर्शन करके हृदय में श्रीराम के चरणों को धारण करके योगाग्नि द्वारा शरीर त्यागा। वह प्रभु चरणों में लीन हो गईं। इस अवसर पर अंबिका त्रिपाठी, हनुमान त्रिपाठी, प्रवेश त्रिपाठी, सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी, चिंताहरण त्रिपाठी, त्रिभुवन नाथ तिवारी, मुकेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र गिरी, मनोज मौर्य, राम आसरे साहू, मदन साहू, अनील साहू सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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