रुद्र महायज्ञ स्थल पर उमड़े भक्त , बोले यज्ञाचार्य शंकर शास्त्री जप व भजन कीर्तन से वश में होता है चंचल मन

 

जफराबाद।क्षेत्र के धनेजा गांव में सई नदी के तट पर स्थित नरईबीर धाम परिसर में चल रहे रुद्र महायज्ञ में कार्यक्रम की शुरुआत भोर से ही वेदपाठी ब्राम्हणों के वेद पाठ से हो रहा है।

 वेदमन्त्रों के बीच बुधवार को पूरे दिन यज्ञ स्थल पर स्वाहा के स्वरों से गूंजता रहा।भव्य यज्ञ मंडप में यजमानों की आहुतियां जनकल्याण के लिए समर्पित थीं। देवरिया कुटी नियार आश्रम के परमसंत श्री त्रिभुवन दास महराज के सानिध्य में जन सहयोग से जनकल्याण के लिए हो रहे इस अनुष्ठान में जन सामान्य की सक्रिय सहभागिता है। श्रद्धालु दानदाता यथाशक्ति समर्पित भाव से आयोजन को साकार रूप देने में जुटे हुए हैं। बड़े सबेरे से ही लोग यज्ञ मंडप की परिक्रमा में जुट जाते हैं। यह क्रम देर शाम तक निरंतर चलता रहता है। हवन-पूजन, आरती के बाद रामकथा चलती है। मंगलवार की रात में रामकथा कहते हुए यज्ञाचार्य शंकर शास्त्री ने कहा कि मन को माया रूपी संसार से हटाकर परमात्मा की ओर जोड़ना ही पुरुषार्थ है। माया की तरफ से मन को मोड़ने का सशक्त माध्यम है भजन- कीर्तन।  यज्ञाचार्य शंकर शास्त्री ने बताया कि राम नाम की जप व भजन कीर्तन करने से मानव को परमात्मा से मिलाने का साधन है। अगर आप जप कर रहे भजन कीर्तन कर रहे है तो आपका चंचल मन कही भटकेगा नही है।  देव दर्शन, भजन के समय तन पुलकित होगा तो भगवान की कृपा मिलते देर नहीं लगेगी। उन्होंने शिव-पार्वती से जुड़े कुछ रोचक प्रसंग सुनाकर श्रद्धालु श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विंध्याचल से पधारे अमरनाथ त्रिपाठी ने श्रोताओं को सत्संग व राम नाम की महिमा बताई। कहा कि इसे जपने से हमारे अंतःकरण को शुद्ध कर त्रैतापों से मुक्ति दिलाने में समर्थ है।

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