प्राकृतिक खेती का रोल मॉडल बनेंगी कृषि सखियां
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बक्शा, जौनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण हाल में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना अंतर्गत जनपद की चयनित कृषि सखियों (सीआरपी) का पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती तकनीक विषयक प्रशिक्षण का आयोजन सोमवार से शुरू हुआ।अध्यक्षता करते हुए उप कृषि निदेशक हिमांशु पांडेय ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कृषि सखिया/सीआरपी द्वारा जिले के किसानों को प्राकृतिक विधि से खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 10 ब्लाको में 55 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल का चयन के साथ हर क्लस्टर में कम से कम 125 किसान शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक खेती वर्ष 2025-26 से गोमती नदी के किनारे वाले 55 ग्राम पंचायत में 2750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 6875 किसान कम लागत में गुणवत्ता युक्त अधिक उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. सुरेश कनौजिया ने प्राकृतिक खेती की अवधारणा एवं सिद्धांत के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि प्राकृतिक खेती से खेत की मिट्टी बीमार नहीं होती रसायन मुक्त उपज स्वास्थ्य, गुणवत्ता युक्त होते हैं तथा पर्यावरण भी शुद्ध रहता है। स्वस्थ जीवन का आधार प्राकृतिक खेती है। कृषि वैज्ञानिक डा. हरिओम वर्मा ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों जैसे वीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत आदि बनाने का तरीका और उनके प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देने के साथ ही इसका प्रायोगिक प्रदर्शन भी कराया। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. रूपेश सिंह ने फसल अच्छादन की विधियों एवं कीट रोगों आदि से बचाने के लिए निमास्त्र, अग्नेयास्त्र, मठरास्त्र आदि के बारे में प्रायोगिक प्रदर्शन कर जानकारी दिया।
कृषि वैज्ञानिक डा. सुरेंद्र प्रताप सोनकर ने प्रशिक्षित कृषि सखियां को अपने कार्य क्षेत्र में क्लस्टर के चयनित कृषकों को प्रशिक्षण देने के साथ ही अपने खेतों पर प्राकृतिक खेती मॉडल स्थापित करके रोल मॉडल भी बनेंगी। कार्यक्रम का संचालन उप परियोजना निदेशक आत्मा डा. रमेश चन्द्र यादव ने किया। इस अवसर पर एसएमएस डा. तेजबल सिंह, पल्लवी विश्वकर्मा, अमित सिंह, सुनील वर्मा, अमित मिश्र, अशोक कुमार सहित तमाम चयनित कृषि सखियों की मौजूदगी रही।
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