बिना रसीद बिक रही दवाएं, औषधि निरीक्षक की जांच में कई मेडिकल स्टोर हुए बेनकाब
जौनपुर। जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद के निर्देश पर शनिवार को जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय ने शहर के दो प्रमुख मेडिकल स्टोरों पर औचक छापेमारी की। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें बिना बिल के दवाओं की बिक्री और स्टॉक में गड़बड़ी प्रमुख रहीं।
औचक निरीक्षण के पहले चरण में नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित नटराज मेडिकल एजेंसी का निरीक्षण किया गया, जहाँ दवाओं की खरीद संबंधी कोई भी क्रय रसीद या बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। कंप्यूटर रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में भी कोई मेल नहीं पाया गया। प्रतिष्ठान को 7 कार्यदिवस के भीतर समस्त खरीद रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
इसके बाद यथार्थ फार्मेसी प्राइवेट लिमिटेड के खुदरा काउंटर पर जांच की गई, जहाँ मरीजों को बिना बिक्री बिल के दवाएं बेची जा रही थीं। यहां भी स्टॉक और कंप्यूटर आंकड़ों में भारी अंतर देखा गया। मरीज का विवरण भी बिक्री चालान में दर्ज नहीं किया गया था।
जिला औषधि निरीक्षक पांडेय ने बताया कि यह औषधि नियमावली 1945 के नियम 65 का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रतिष्ठान से तीन दवा नमूने एकत्र कर राजकीय प्रयोगशाला, लखनऊ भेजे गए हैं। दोनों प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि यथार्थ फार्मेसी पर 20% छूट का बड़ा बोर्ड लगा है, जो फार्मेसी प्रैक्टिस विनियम 2015 के अध्याय 7 व 8 के तहत पूरी तरह से अवैध और अनैतिक है। इससे छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा की स्थिति उत्पन्न होती है और यह प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 4 का भी उल्लंघन है।
जिला औषधि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी मेडिकल व्यवसायियों को नियमों के पालन का सख्त निर्देश दिया गया है।

