अनगिनत हैं लाभ फिर भी लद गए दोना पत्तल के दिन

 

जौनपुर। दोना पत्तल में भोजन करना हमारे संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा हैं लेकिन आज की पीढ़ी ने इसे दकियानूसी मानसिकता का प्रतीक मानकर इससे किनारा कर लिया है। लोगों का यह विचार वास्तव में संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है जो तात्कालिक लागत- लाभ और सुलभता पर केंद्रित है।

आज हम सीधे - सीधे तत्काल लागत - लाभ से प्रेरित होकर ही ऐसा करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में  थर्माकोल के बने दोना पत्तलों ने पलाश और महुये की पत्तियों से बने दोना पत्तलों के बाज़ार को लगभग समाप्त कर दिया है। जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण थर्माकोल के बर्तनों को सस्ता होना माना जाता है, लेकिन इनमें भोजन करने का हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल पड़ता है ।इन बर्तनों में आकर्षक रूप से बनाये जाने वाले सिल्वर प्लेट के लिए जिन केमिकल का प्रयोग किया जाता है वे तो और खतरनाक हैं।

महुये और पलाश के बने दोना पत्तल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये इको-फ्रेंडली माने जाते हैं क्योंकि ये बायोडिग्रेडेबल होते हैं इन्हें आसानी से मिट्टी में दबाकर जैविक खाद बनाई जा सकती है। इनके प्रयोग से एक तरफ हानिकारक केमिकल से दूरी बनती है और अधिक वृक्ष लगाने को प्रोत्साहन मिलता है तथा स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलता है।


यह विकास खंड मछलीशहर के एक गांव की बर्थडे पार्टी का शनिवार रात का दृश्य है जहां बच्चे मिट्टी और पत्तल के बर्तनों में भारतीय व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं।ऐसा करने का मकसद पूछे जाने पर आयोजक ने बताया कि भोजन करने वाले सारे बच्चे जीवन में पहली बार मिट्टी और पत्तल के बने बर्तन में भोजन कर रहे हैं। उद्देश्य मात्र इतना है कि वह अपनी परम्पराओं से परिचित हों।आज की पीढ़ी को परम्पराओं से जोड़ने की जिम्मेदारी पुरानी पीढ़ी की  है।अपनाना और न अपनाना उन पर छोड़ देना चाहिए, लेकिन परिचय ही न करायें तो यह पुरानी पीढ़ी की परम्पराओं और राष्ट्र चेतना के प्रति उदासीनता है।

आपको बताते चलें कि एन जी टी ने चीनी और नमक जैसे रोजमर्रा की चीजों में माइक्रो प्लास्टिक की मौजूदगी की मिडिया रिपोर्टों को स्वतः संज्ञान में लेते हुए केन्द्रीय पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से माइक्रो प्लास्टिक की पहचान और परीक्षण के लिए अपनाई जा रही पद्धतियों का ब्यौरा दो सप्ताह में पेश करने को कहा है।एन जी टी का कडा रूख ऐसे ही नहीं है बल्कि माइक्रो प्लास्टिक से आंतों में सूजन और जलन की समस्या आती है त्वचा की बीमारियों तथा लम्बे समय तक प्रयोग करने से कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।

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