औद्योगिक क्षेत्र के लिये भूमि अधिग्रहण का ग्रामीणों ने किया विरोध
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15 हजार आबादी के सामने पलायन व बेरोजगारी का जताया खतरा
उपजाऊ भूमि बचाने की मांग, प्रशासन पर बिना सहमति प्रस्ताव भेजने का आरोपजौनपुर। करंजाकला विकास खण्ड क्षेत्र के ग्रामसभा चांदी गहना, भकुरा, चकवा, आरा एवं दुधौरा के ग्रामीणों ने प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज कर दिया है। ग्रामीणों ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण गिरीश चंद्र यादव के भाई सुनील यादव को ज्ञापन सौंप करके प्रस्तावित अधिग्रहण को तत्काल रोकने की मांग किया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की गई तो लगभग 15 हजार की आबादी के सामने पलायन, बेरोजगारी और भूमिहीनता का संकट खड़ा हो जायेगा।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि 11 अप्रैल 2026 को एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर से उन्हें जानकारी मिली कि 5 गांवों की करीब 1976 एकड़ भूमि औद्योगिक गलियारा विकसित करने के लिए अधिग्रहित की जाएगी। इसके बाद गांवों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद प्रशासन की ओर से खबर का खंडन नहीं किया गया जबकि राजस्व अधिकारियों द्वारा दबी जुान से प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की बात कही जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित भूमि अत्यंत उपजाऊ है जहां वर्षभर खेती होती है और अधिकांश किसान छोटे व सीमांत हैं। किसी के पास 10 बिस्वा तो किसी के पास दो एकड़ से कम भूमि है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना किसानों की सहमति और भौगोलिक स्थिति का सही आकलन किए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया है जबकि नियमानुसार 70 से 80 प्रतिशत किसानों की सहमति आवश्यक होती है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र नगर पालिका सीमा से महज छह किलोमीटर दूर है तथा सिटी बाईपास फोरलेन निर्माण के बाद यह इलाका शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाएगा। ऐसे में आबादी से सटी भूमि पर उद्योग स्थापित करना उचित नहीं है। साथ ही उद्योगों से निकलने वाले धुएं व प्रदूषित पानी से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
ज्ञापन देने वालों संजय सिंह, अजीत सिंह, सुजीत सिंह, कमलेश सिंह, कैलाश, धर्मेंद्र सिंह, विवेक राय, राम उजागीर बिंद, प्रधान रामधनी बिंद, राजेंद्र मिस्त्री आदि प्रमुख रहे।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि 11 अप्रैल 2026 को एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर से उन्हें जानकारी मिली कि 5 गांवों की करीब 1976 एकड़ भूमि औद्योगिक गलियारा विकसित करने के लिए अधिग्रहित की जाएगी। इसके बाद गांवों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद प्रशासन की ओर से खबर का खंडन नहीं किया गया जबकि राजस्व अधिकारियों द्वारा दबी जुान से प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की बात कही जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित भूमि अत्यंत उपजाऊ है जहां वर्षभर खेती होती है और अधिकांश किसान छोटे व सीमांत हैं। किसी के पास 10 बिस्वा तो किसी के पास दो एकड़ से कम भूमि है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना किसानों की सहमति और भौगोलिक स्थिति का सही आकलन किए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया है जबकि नियमानुसार 70 से 80 प्रतिशत किसानों की सहमति आवश्यक होती है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र नगर पालिका सीमा से महज छह किलोमीटर दूर है तथा सिटी बाईपास फोरलेन निर्माण के बाद यह इलाका शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाएगा। ऐसे में आबादी से सटी भूमि पर उद्योग स्थापित करना उचित नहीं है। साथ ही उद्योगों से निकलने वाले धुएं व प्रदूषित पानी से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
ज्ञापन देने वालों संजय सिंह, अजीत सिंह, सुजीत सिंह, कमलेश सिंह, कैलाश, धर्मेंद्र सिंह, विवेक राय, राम उजागीर बिंद, प्रधान रामधनी बिंद, राजेंद्र मिस्त्री आदि प्रमुख रहे।

