समाजसेवी पं. राजबली शुक्ल की चौथी पुण्यतिथि पर 21 शिवभक्त एवं संत सम्मानित
समाजसेवी पं. राजबली शुक्ल की चौथी पुण्यतिथि पर 21 शिवभक्त एवं संत सम्मानित
जौनपुर। समाजसेवा, सादगी और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रतीक रहे स्वर्गीय पंडित राजबली शुक्ल की चौथी पुण्यतिथि शनिवार को भंडारी रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर के पूर्व प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अखिलेश्वर शुक्ला अपने परिवार के साथ उपस्थित रहे और अपने पूज्य पिता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंदिर परिसर में स्थित विशाल वटवृक्ष के नीचे आयोजित कार्यक्रम में प्रधान पुजारी, परिवार से दूर रहकर संत-महात्माओं का जीवन व्यतीत कर रहे शिवभक्तों तथा अन्य श्रद्धालुओं सहित कुल 21 लोगों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज और धर्म की सेवा में जुटे उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था, जो बिना किसी अपेक्षा के जनसेवा और आध्यात्मिक साधना में लगे हुए हैं।
इस अवसर पर महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। भजन, गीत-संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय लोगों ने भी प्रसाद वितरण और कार्यक्रम के सफल आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
ज्ञात हो कि स्वर्गीय पं. राजबली शुक्ल का निधन 20 जून 2022 को काशी के गोदौलिया क्षेत्र में हुआ था। वे मूल रूप से बिहार के रोहतास जनपद स्थित शुक्लपुरा गांव के निवासी थे। अपने पीछे वे पांच पुत्रों, एक पुत्री तथा भरे-पूरे परिवार को छोड़ गए।
अपने पिता की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए उनके ज्येष्ठ पुत्र एवं पूर्व प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अखिलेश्वर शुक्ला प्रत्येक वर्ष पुण्यतिथि पर समाज के उन वर्गों को सम्मानित करते हैं, जो सामान्यतः चर्चा और सम्मान से दूर रह जाते हैं। प्रथम पुण्यतिथि पर उन्होंने जौनपुर के विभिन्न चौराहों पर भीषण गर्मी में यातायात व्यवस्था संभाल रहे होमगार्ड जवानों को सम्मानित किया था। द्वितीय पुण्यतिथि पर पॉलीटेक्निक स्थित गौशाला के 21 गौसेवकों को सम्मानित किया गया, जबकि तृतीय पुण्यतिथि पर नगर पालिका परिषद जौनपुर की 21 महिला सफाईकर्मियों को सम्मान देकर एक प्रेरणादायी पहल की थी।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) अखिलेश्वर शुक्ला ने कहा कि उनके पिता पं. राजबली शुक्ल सरलता, सादगी और आध्यात्मिक चिंतन के धनी व्यक्ति थे। वे राष्ट्र निर्माण में श्रमजीवी वर्ग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे तथा वीआईपी संस्कृति को सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में बाधक समझते थे।
उन्होंने कहा, "पिताजी हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान और श्रम की गरिमा की बात करते थे। उनकी स्मृति में मैं उन लोगों को सम्मानित करने का प्रयास करता हूं, जो निस्वार्थ भाव से समाज और धर्म की सेवा कर रहे हैं। यही उनके प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है।"
कार्यक्रम में प्रधान पुजारी, संत-महात्मा, शिवभक्तों के अलावा सहायता ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष गुप्ता, पत्रकार संघ अध्यक्ष संजय अस्थाना, सुनील मिश्रा, दीपक श्रीवास्तव, विद्याधर विद्यार्थी ‘डब्ल्यू’, श्रीमती स्नेहलता शुक्ला, मानस राज शुक्ला, गौरव सिंह सहित अनेक पत्रकार, स्थानीय महिलाएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अंत में प्रो. (डॉ.) अखिलेश्वर शुक्ला ने कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने वाले सभी श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज में सम्मान और संवेदना की यह परंपरा निरंतर जारी रहेगी।

