डीएम व जिला आबकारी अधिकारी के नाम पर धन मांगने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर दो आबकारी कर्मियों पर मुकदमा दर्ज
सीजेएम के आदेश पर लाइनबाजार थाने में मुकदमा दर्ज।
आबकारी निरीक्षक और सिपाही पर धन उगाही व धमकी का आरोप।
शिकायतकर्ता ने ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया।
पुलिस ने जांच शुरू की, साक्ष्यों के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई।
जौनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश पर लाइनबाजार थाने में आबकारी विभाग के एक निरीक्षक और एक सिपाही के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी एवं अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला शराब दुकान संचालक से कथित रूप से विभागीय खर्च के नाम पर धन मांगने से जुड़ा है।
लाइनबाजार थाना क्षेत्र के हुसेनाबाद निवासी राकेश कुमार सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी चौरी बाजार क्षेत्र में देशी शराब की दुकान संचालित करती हैं। आरोप है कि 24 अगस्त 2024 को आबकारी विभाग के सिपाही शुजाउद्दीन ने फोन कर विभाग में आकस्मिक खर्च आने की बात कही और धनराशि देने के लिए कहा।
पीड़ित का आरोप है कि बाद में उसकी बातचीत आबकारी निरीक्षक आदित्य सिंह से कराई गई। प्रार्थना पत्र के अनुसार निरीक्षक ने कथित रूप से कहा कि विभागीय खर्च के लिए विभिन्न दुकानों से धन लिया जा रहा है तथा उसके हिस्से में 1800 रुपये आते हैं।
राकेश कुमार सिंह का आरोप है कि धनराशि न देने पर दुकान सीज कराने तथा उनकी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई कराने की धमकी दी गई। भयवश उन्होंने संबंधित कार्यालय पहुंचकर 1800 रुपये दे दिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समय-समय पर अन्य मदों में भी धन की मांग की जाती रही।
वादी ने न्यायालय को बताया कि उसने बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी है तथा मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों, आबकारी आयुक्त कार्यालय और पुलिस अधिकारियों से भी की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
मामले की सुनवाई के बाद सीजेएम ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 9 जून 2026 को लाइनबाजार थाने में आबकारी निरीक्षक आदित्य सिंह और आबकारी सिपाही शुजाउद्दीन के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
पुलिस का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। मामले की सत्यता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

