मृत्युञ्जय महादेव धाम में भागवत कथा का भव्य समापन, हवन-पूजन व विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब
उमरछा। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं आस्था के केंद्र मृत्युञ्जय महादेव धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का समापन मंगलवार को वैदिक रीति-रिवाजों, भव्य हवन-पूजन और विशाल भंडारे के साथ श्रद्धा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया। समापन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कथा के विश्राम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उपाध्याय एवं उनकी धर्मपत्नी पद्मा उपाध्याय, तथा सतीश कुमार उपाध्याय एवं नीलम उपाध्याय मुख्य यजमान के रूप में सपत्नीक शामिल हुए। पूज्य कथा व्यास अनिलेश शुक्ल और उनके साथ पधारे विद्वान आचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ एवं हवन संपन्न कराया गया। मुख्य यजमानों सहित बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना की।
कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षण कथा के प्रारंभ में निकाली गई भव्य कलश यात्रा से जुड़ी रही। आयोजन समिति की ओर से कलश यात्रा में शामिल सभी महिलाओं को स्मृति चिह्न के रूप में कलश भेंट किया गया, जिसे प्राप्त कर महिला श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता व्यक्त की।
समापन समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति, भाजपा महामंत्री संदीप तिवारी, पीयूष गुप्ता, संतोष मिश्र एवं अजय सिंह सहित अनेक पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके अलावा यादवेंद्र मिश्र, कृष्ण कुमार मिश्र, दीपक सिंह ‘मिंटो’, अतुल कुमार पांडेय, राकेश जायसवाल, रमेश मिश्र, रमाशंकर उपाध्याय, शेषनाथ शुक्ल, लक्ष्मी उपाध्याय तथा पद्माकर शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
हवन की पूर्णाहुति एवं महाआरती के पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
समापन अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उपाध्याय ने कथा व्यास अनिलेश शुक्ल, उपस्थित आचार्यों, आयोजन समिति तथा दूर-दराज से पहुंचे सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।

