मृत्युंजय महादेव धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, राम-केवट संवाद सुन भावुक हुए भक्त
उमरछा (जौनपुर)। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर मृत्युंजय महादेव धाम में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों के 16वें दिन सोमवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्य आचार्य पं. अभिषेक मिश्र के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया तथा बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान अरविंद सिंह, हिमांशु उपाध्याय, शिवानी सिंह, तृप्ति उपाध्याय और शिवानी शुक्ल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से “ॐ नमः शिवाय” महामंत्र का जाप किया।
दोपहर बाद आयोजित श्रीरामचरितमानस मास परायण पाठ में अयोध्याकांड के वनगमन प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया गया। कथा वाचक पं. श्रेय मिश्र ने सहयोगी कैलाश नाथ शुक्ल, हीरामणि उपाध्याय, रामसागर शुक्ल एवं अरविंद शुक्ल के साथ राम-केवट संवाद की मार्मिक कथा सुनाई। गंगा तट पर प्रभु श्रीराम और केवट के बीच हुए प्रेम, समर्पण और भक्ति के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और मानस चौपाइयों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिरस में डुबो दिया। केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने की जिद और उसके निष्कलुष प्रेम का वर्णन सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भजनों की मधुर प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।
विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत अशोक शुक्ल ने पत्नी के साथ मुख्य यजमान के रूप में भगवान मृत्युंजय महादेव का दुग्धाभिषेक एवं रुद्राभिषेक कराया। संध्या बेला में महाआरती के दौरान मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और भक्तों के जयघोष से गूंज उठा। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
आयोजन समिति के अनुसार पुरुषोत्तम मास भर चलने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रामचरितमानस पाठ, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन के माध्यम से क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण बना हुआ है।

