सदर सीट पर भाजपा को चुनौती देने के लिए नए चेहरे की तलाश, क्या विक्की उपाध्याय बन सकते हैं विपक्ष की सबसे बड़ी उम्मीद?
जौनपुर। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही जौनपुर सदर विधानसभा सीट की राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। पिछले दो चुनावों में लगातार भाजपा के खाते में गई इस सीट को वापस हासिल करने के लिए विपक्षी दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष ने उम्मीदवार चयन में फिर चूक की, तो 2027 में भी सदर सीट पर कमल खिलना लगभग तय माना जाएगा।
इसी मुद्दे को लेकर शिराज ए हिंद डॉट कॉम ने शहर के बुद्धिजीवियों, व्यापारियों, शिक्षकों, किसानों और युवाओं से बातचीत की। चर्चा के दौरान कई नाम सामने आए, लेकिन सबसे अधिक समर्थन दो चेहरों को मिला। इनमें कांग्रेस नेता विकेश उपाध्याय ‘विक्की’ और समाजवादी पार्टी के नेता व दवा व्यापारी शकील अहमद प्रमुख रूप से शामिल रहे। लोगों का मानना है कि ये दोनों ऐसे चेहरे हैं जिनकी हिंदू और मुस्लिम दोनों वर्गों में अच्छी पकड़ है और जो पारंपरिक वोट बैंक की सीमाओं को तोड़कर व्यापक समर्थन जुटाने की क्षमता रखते हैं।
शिक्षक अजय सिंह, किसान अरविंद पांडेय, व्यापारी अशोक सोनी, रंजीत यादव, डॉ. अभय दुबे, रहमान अहमद, राज यादव और राजन सिंह सहित बड़ी संख्या में लोगों ने बातचीत के दौरान कहा कि यदि कांग्रेस-सपा गठबंधन की ओर से विकेश उपाध्याय को उम्मीदवार बनाया जाता है तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है और विपक्ष की जीत की संभावना भी मजबूत होगी।
व्यापार, समाजसेवा और राजनीति में मजबूत पहचान
विकेश उपाध्याय का नाम इन दिनों जिले की राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कम उम्र में उन्होंने व्यापार जगत में ऐसी सफलता हासिल की है, जिसे पाने का सपना कई लोग पूरी जिंदगी देखते रहते हैं। जिले में उनके आधा दर्जन से अधिक प्रतिष्ठान संचालित हैं, जहां सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
राजनीतिक विरासत भी उनके पक्ष में एक मजबूत आधार मानी जाती है। उनके बाबा डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय बरसठी विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1977 और 1980 में विधायक चुने गए थे। इसके अलावा वे वर्ष 1985 से 1995 तक भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष पद पर भी रहे। यही कारण है कि विकेश उपाध्याय का नाम केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी उनकी सक्रियता चर्चा में रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्की उपाध्याय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत है। विभिन्न वर्गों में उनकी पहुंच और संपर्क उन्हें एक संभावित प्रभावशाली उम्मीदवार के रूप में स्थापित करते हैं।
भाजपा का मजबूत गढ़ बनी सदर सीट
जौनपुर सदर सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की है। भाजपा विधायक गिरीश चंद्र यादव लगातार दो बार इस सीट से विजयी हुए और प्रदेश सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे। गिरीश यादव विभिन्न मंचों से गोमती नदी के घाटों के सुंदरीकरण, सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर सदर सीट पर मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में विपक्ष को केवल समीकरणों के भरोसे नहीं बल्कि एक प्रभावशाली, स्वच्छ छवि और सर्वमान्य चेहरे के साथ मैदान में उतरना होगा।
2017 से 2022 तक का चुनावी गणित
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की ओर से तत्कालीन विधायक नदीम जावेद उम्मीदवार बनाए गए थे। वहीं भाजपा ने अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे के रूप में गिरीश चंद्र यादव को टिकट देकर सभी को चौंका दिया था। उस समय भाजपा संगठन के भीतर गिरीश यादव की पहचान मजबूत थी, लेकिन आम जनता के बीच उनका नाम उतना चर्चित नहीं था। बावजूद इसके, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर और भाजपा की मजबूत रणनीति के चलते गिरीश यादव ने जीत दर्ज की।
इसके बाद 2022 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर गिरीश यादव पर भरोसा जताया। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक अरशद खान को मैदान में उतारा, बसपा ने सलीम खान को टिकट दिया और कांग्रेस ने नदीम जावेद को प्रत्याशी बनाया। विपक्षी वोटों के बिखराव का लाभ भाजपा को मिला और गिरीश यादव दूसरी बार भी विजय हासिल करने में सफल रहे।
2027 की लड़ाई में चेहरा होगा सबसे बड़ा मुद्दा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2027 का चुनाव केवल दलों के बीच नहीं बल्कि चेहरों की लड़ाई भी होगा। यदि विपक्ष एकजुट होकर ऐसा उम्मीदवार उतारता है जिसकी सभी वर्गों में स्वीकार्यता हो, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं यदि टिकट बंटवारे में मतभेद या वोटों का बिखराव हुआ तो भाजपा को तीसरी बार जीत की राह आसान हो सकती है।
फिलहाल जौनपुर की राजनीतिक गलियारों में एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है—क्या विकेश उपाध्याय ‘विक्की’ वह नया चेहरा साबित होंगे जो सदर सीट पर भाजपा के विजय रथ को रोक सकेगा, या फिर 2027 में भी कमल ही खिलेगा? आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब राजनीतिक समीकरण और दलों की रणनीति तय करेगी।


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