220 साल से महक रही जौनपुर की शान, जकारिया खानदान ने बचाई विश्व प्रसिद्ध इत्र की पहचान

1805 से आज तक कायम है खुशबू का सफर, परफ्यूम के दौर में सिमटता जा रहा पुश्तैनी कारोबार; सरकार से संरक्षण की उम्मीद

जौनपुर। बदलते दौर में जहां आधुनिक परफ्यूम और विदेशी ब्रांडों ने पारंपरिक इत्र के कारोबार को कड़ी चुनौती दी है, वहीं जौनपुर का एक परिवार आज भी लगभग 220 वर्षों पुरानी खुशबू की विरासत को पूरी शिद्दत से संजोए हुए है। यह परिवार न केवल अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि जौनपुर की विश्व प्रसिद्ध इत्र की पहचान को देश और विदेश तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

कभी जौनपुर का इत्र उद्योग अपनी अनोखी खुशबू के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता था। यहां तैयार होने वाला प्राकृतिक इत्र राजघरानों से लेकर आम लोगों तक की पहली पसंद हुआ करता था। लेकिन समय के साथ बाजार में आधुनिक परफ्यूम की बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव ने इस पारंपरिक उद्योग को गहरा झटका दिया। नतीजा यह हुआ कि जिले के सैकड़ों परिवारों ने अपना पुश्तैनी इत्र कारोबार बंद कर अन्य व्यवसाय अपनाने में ही भलाई समझी।

इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच जकारिया खानदान आज भी इस ऐतिहासिक धरोहर को जीवित रखे हुए है। नगर कोतवाली चौराहे पर स्थित उनकी इत्र की दुकान आज भी लोगों को उस दौर की याद दिलाती है, जब जौनपुर की पहचान उसकी खुशबू से होती थी।

जकारिया खानदान के सातवीं पीढ़ी के दुकान संचालक मोहम्मद मुस्तफा जकारिया ने शिराज ए हिंद डॉट कॉम से खास बात चीत में कहा कि उनके पूर्वजों ने वर्ष 1805 में बलुआघाट मोहल्ले स्थित अपने घर में इत्र बनाने का कार्य शुरू किया था। वर्षों तक घर में ही इत्र तैयार किया जाता रहा। बाद में वर्ष 1942 में नगर कोतवाली चौराहे पर दुकान की स्थापना की गई, जो आज भी उसी गौरव के साथ संचालित हो रही है। परिवार ने समय के साथ अपने कारोबार का विस्तार करते हुए मुंबई, कोलकाता और सऊदी अरब तक अपनी पहचान बनाई, जहां उनके परिवार के सदस्य इस कारोबार को संभाल रहे हैं।

जकारिया परिवार द्वारा तैयार किए जाने वाले इत्र की खुशबू देश की कई नामचीन हस्तियों तक पहुंच चुकी है। हाल ही में जौनपुर दौरे पर आईं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को इसी दुकान की बनी विशेष इत्र भेंट किया गया। इतना ही नहीं, चुनावी सभाओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं ने भी अपने भाषणों में जौनपुर के इत्र का उल्लेख कर इसकी ऐतिहासिक पहचान को रेखांकित किया था।

मोहम्मद मुस्तफा का कहना है कि यदि सरकार इस पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू करे, प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए तो यह उद्योग फिर से नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। इससे न केवल जौनपुर की ऐतिहासिक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और बेरोजगारी कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

आज जब दुनिया कृत्रिम सुगंधों की ओर बढ़ रही है, ऐसे समय में जौनपुर का यह परिवार अपनी मेहनत, परंपरा और विरासत की खुशबू को जीवित रखे हुए है। जकारिया खानदान की यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक धरोहर, हुनर और पहचान की ऐसी दास्तान है, जिसकी महक पिछले दो शताब्दियों से पूरी दुनिया में फैल रही है।

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