अजोशी धाम में बुढ़वा मंगल पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब,त्रेतायुग से जुड़ी है धाम की मान्यता
जौनपुर। श्री पावन महावीर धाम अजोशी लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बजरंगबली के इस पावन दरबार में दूर-दराज से भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव से हनुमान जी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है। धाम पर दर्शन-पूजन के साथ पवित्र स्नान कर श्रद्धालु सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता की कामना करते हैं।
श्री पावन महावीर धाम अजोशी से जुड़ी लोक मान्यता इसे त्रेतायुग से जोड़ती है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था और लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर निकले थे। वापस लौटते समय भरत जी द्वारा चलाए गए बाण से घायल होकर हनुमान जी के इस स्थान पर गिरने की कथा स्थानीय लोगों में प्रचलित है।
पुरखों और बुजुर्गों से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन धरती पर बजरंगबली की दिव्य उपस्थिति हुई और यहां स्वयंभू हनुमान प्रतिमा के प्रकट होने की कथा कही जाती है। यही वजह है कि श्रद्धालुओं के बीच अजोशी धाम को लेकर गहरी आस्था है। हालांकि यह मान्यता धार्मिक एवं लोक परंपराओं पर आधारित है, लेकिन भक्तों के विश्वास में इसका विशेष स्थान है।
नाग पंचमी के बाद पड़ने वाले मंगलवार को यहां बुढ़वा मंगल के रूप में विशेष धार्मिक उत्सव मनाया जाता है। इस दिन मंदिर में बजरंगबली का विशेष श्रृंगार, पूजन-अर्चन और आरती की जाती है। भोर से ही श्रद्धालुओं का धाम पहुंचना शुरू हो जाता है और दिन चढ़ने के साथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती जाती है।
भक्त भगवान हनुमान को पूरी, मिठाई, फल और अन्य प्रसाद अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठता है। भक्ति गीतों और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और खुशहाली के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
श्री पावन महावीर धाम अजोशी सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक विश्वास का जीवंत केंद्र है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन कर मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
धाम के प्रधान पुजारी अरविंद मिश्र एवं पुजारी शुभम मिश्रा के अनुसार, बुढ़वा मंगल के महापर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन, विशेष श्रृंगार और प्रसाद अर्पित करने पहुंचते हैं। उनका कहना है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ बजरंगबली के चरणों में आने वाले भक्तों पर प्रभु की कृपा बनी रहती है।
बुढ़वा मंगल पर अजोशी धाम में आस्था और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जहां हर ओर बजरंगबली के जयकारे सुनाई देते हैं। भक्तों के लिए यह पर्व महज पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण प्रकट करने का पावन दिन बन जाता है।

